जानें क्या है कोरोना का योग और कब होगा कोविड-19 का खात्मा!

भूमंडल के ऊपर आकाश (ब्रहमांड) में निरंतर अपने पथ तथा गति पर भ्रमणशील ग्रहों के चुंबकीय बल के प्रभाव से पृथ्वी पर रहने वाले मानव, जंगली जानवर, पशु पक्षी तथा पालतु जानवरों में वायरस तथा जीवाणु से महामारी के योग बनते रहते हैं। जो ग्रहों की निरंतर गति के कारण स्थायी नहीं होते हैं। कोरोना भी इसी प्रकार का एक संयोजन है। पंचग्रहीश योग के साथ प्रारंभ कैलेंडर वर्ष 2020 तथा मंगल, शनि, बुध, गुरु के युति से प्रारंभ विक्रम संवत 2077 जिसका राजा बुध ग्रह तथा मंत्री चंद्रमा वर्ष का ‘माध्यम’ होने का योग बनाएंगे।

विक्रम संवत 2077 में कोविड 19 तथा ज्योरतिष का अनुमान (विभिन्न योग): भारत की कुंडली में अष्टवम भाव में गुरु तथा केतु की युति लंबे समय तक नहीं रहेगी। 31 मार्च 2020 के बाद गुरु धनु राशि से निकलकर मकर में भ्रमण करेगा।
14 अप्रैल 2020 से सूर्य की कर्क के अक्षांश की ओर बढ़कर संक्रमण में कमी का योग बनाएगा।
वर्ष का राजा बुध होने के कारण ज्ञान तथा दान दोनो में बढ़ोतरी का योग बनेगा।
संक्रमण रोग का कारक शनि 12 मई, 2020 से अपनी वक्र गति धारण करेगा, जिससे रोग में कमी का योग बनेगा।
संक्रमण रोग को तेजी से फैलाने वाला केतु 24 सितंबर 2020 को धनु राशि से निकलेगा, इसके पश्चामत पूर्ण राहत के योग बनेंगे। भारत की कुंडली में मृत्युर स्थानन को छोड़ेगा।
मीन राशि का चंद्रमा समुद्र पार से संक्रमण लाने के अधिक योग बनाएगा।
वर्ष का राजा बुध के कारण ज्ञान तथा दान दोनो से इस बीमारी पर नियंत्रण का योग बनेगा। इस महामारी से भयभीत होने के स्थातन पर धैर्य पूर्वक सामना करने की आवश्यबकता है। आशा की जाती है कि इसका वैक्सीशन और टीका विकसित हो जाएगा। चिकित्सकों तथा सरकारों के निर्देशों का पालन करें।

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