मरकज़ वालों को लगता है, उन्हें इलाज की ज़रूरत नहीं, व्यवहार भी अच्छा नहीं: दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन

नई दिल्ली: भारत सहित दुनिया के ज्‍यादातर देश इस समय कोविड-19 की महामारी का सामना कर रहे हैं. देश में  कोरोना वायरस के संक्रमण से प्रभावितों लोगों की संख्‍या में लगातार इजाफा हो रहा है. यह संख्‍या अब चार हजार के पार पहुंच गई है, इसमें से 3,666 का इस वक्त इलाज चल रहा है. देश की राजधानी में कोरोना वायरस के मामले 500 के पार पहुंच गए हैं. दिल्‍ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने एनडीटीवी इंडिया से खास बातचीत में बताया कि अब तक  जो 503 पॉजिटिव मामले आए हैं, उसमें से 320 तब्‍लीगी जमात से जुड़े है. उन्‍होंने बताया निजामुद्दीन मरकज के लोगों के कुछ टेस्ट लेडी हार्डिंग में हो रहे हैं उनकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है. मरकज के जितने भी लोग हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे, उन सभी की रिपोर्ट आज शाम तक आ जाने की उम्मीद है

उन्‍होंंने बताया कि मरकज के लोगों के साथ अभी भी समस्‍या है और मेडिकल स्‍टाफ के साथ उनका व्‍यवहार अच्‍छा नहीं है.बातचीत में जैन ने बताया कि  71 मामले ऐसे हैं जिनके बारे में अभी जांच की जा रही है कि इनको कोरोना कैसे हुआ. यह लोग विदेश नहीं गए थे या इनकी फैमिली से कोई विदेश नहीं गया था. हम इन सब से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आप ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में तो नहीं आए जो कोरोना वायरस से संक्रमित था. 

एक अन्‍य सवाल के जवाब में दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने बताया कि कल शाम को हमें केंद्र सरकार से मैसेज आया है कि 27,000 पीपीई के देंगे लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला है, हो सकता है आज या कल में मिल जाए. उन्‍होंने बताया कि हमने 50,000 टेस्टिंग किट और 200 वेंटिलेटर भी मांगे थे लेकिन उस पर अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. पुलिस ने हमारे अस्पतालों और क्‍वेरेंटीन सेंटर पर सुरक्षा बढ़ाई है लेकिन मरकज के लोगों के चलते अभी भी समस्या है. उनका व्यवहार अच्छा नहीं है, भाषा की भी समस्या है और उन लोगों को लगता है कि हमको इलाज कराने की जरूरत नहीं थी तो हमारा इलाज क्यों किया जा रहा है. जैन ने बताया कि अगर मरकज के मामलों को हटा दें तो हमारा 7 दिनों में आंकड़ा दोगुना हो रहा है. दिल्ली सरकार के पास करीब 200 वेंटिलेटर हैं जिसमें से दो या तीन ही इस्तेमाल हो रहे हैंकोरोना के लिए 2000 बेड निर्धारित किए हुए हैं जिसमें से करीब 550 ही इस समय इस्तेमाल हो रहे हैं.

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