मां ! मैं बहुत थक गया हूं, अब आगे नहीं चल पाऊंगा..

गोरखपुर
शहर में मज़दूर जैसा दर-ब-दर कोई नहीं, जिस ने सब के घर बनाए उस का घर कोई नहीं…जिन रास्तों पर चलकर ये लोग अपनी मंजिल खोज रहे है, वो रास्ते भी इनके खून-पसीने से ही बने हैं। अफसोस तो इस बात का है कि इनके लिए उन सड़कों पर कोई वाहन नहीं दौड़ रहा। कुछ साल पहले एक तस्वीर आपने देखी होगी। जिसमें लाल टी-शर्ट पहने एक बच्चे की लाश समुद्र में तैर रही थी। ये तस्वीर तुर्की के एक बच्चे की थी। इस्लामिक स्टेट के कहर से बचने के लिए ये लोग नावों पर ही सवार होकर दूसरे देशों की ओर जान बचाकर भाग रहे थे। दो नावों में कुल 12 शरणार्थी थे। दोनों नावें डूब गईं थीं। जिंदगी की तलाश में निकले सभी लोगों की मौत हो गई। इस तस्वीर ने बड़े-बड़े देशों को नीतियां बदलने के लिए मजबूर कर दिया था। आज एक बच्चे और मां की तस्वीर हिंदुस्तान से आई है। जहां एक बच्चा 80 किलोमीटर का सफर तय कर मां के पैरों पर ही लेट गया और शायद अपनी मां से यही कह रहा होगा कि मां…बस करो अब मैं आगे नहीं चल पाऊंगा…
सोशल मीडिया में वायरल तस्वीर
सोशल मीडिया में ऐसी हृदय विदारक तस्वीरें आ रही हैं कि जिनको देखकर दिल कांप उठता है। ऐसी ही एक तस्वीर दैनिक समाचार पत्र में छपी है। इस तस्वीर को देखकर शायद ही कोई इंसान होगा जिसकी आंखें नम नहीं होंगी। इस तस्वीर में एक बच्चा अपनी मां के पैरों पर लेट गया है। बच्चे की मां सामने से गुज़र रहे वाहनों को देख मदद की आस लगा रही है। शायद इस वक्त ये मां अपने बारे में नहीं बल्कि उसके पैरों पर पड़े बच्चे की सोच रही है। वो सोच रही है कि इंसानों की इस दुनिया में शायद कोई फरिश्ता मां-बेटे की इस हालत पर तरस खाकर मदद कर दे और कुछ दूर तक उन दोनों को पहुंचा दे।

न काम है, न पैसा
ये लोग बाहर दिहाड़ी मजदूरी पर काम करते हैं। लॉक डाउन के बाद न तो काम है, न पैसा। अब यह लोग वहां पर रुके तो किस लिए। एक तरफ पूरे मुल्क के ऊपर कोरोना वायरस का कहर जारी है। वहीं इन मजदूरों के ऊपर दोहरी मार है। कोरोना से ज्यादा जो दर्द है वह है इनके पेट का। इन मजदूरों का कहना है कि आखिरकार इस महामारी से तो यह लड़ लेंगे लेकिन भूखे पेट से कैसे लड़ें।
गोरखपुर से आई ये तस्वीर
इसी वजह से हजारों की तादात पर यह लोग वापस अपने घर की तरफ रुख कर रहे ।हैं घर में कम से कम पैसा तो नहीं लगेगा और भरपेट खाना भी मिल जाएगा। इस तस्वीर को देख हजारों लोगों की आंखें नम हैं। जानकारी के मुताबिक यह तस्वीर शुक्रवार की है और इस तस्वीर को खींचा गया है एमएमयूटी के पास। एक मां बस्ती से देवरिया के लिए पैदल जाती है। यह मां अपने बच्चे को लिए 80 किलोमीटर का सफर तय कर गोरखपुर जब पहुंचती है तो बच्चा थक्कर बीच सड़क पर ही मां के पैर पकड़ कर बैठ जाता है शायद इस बच्चे का दिल और जुबां एक ही बात बोल रही होगी कि मां मैं अब मैं थक गया हूं… मैं अब आगे नहीं जा सकता।

सिसोदिया ने किया ट्वीट
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा है, “देश भर में कामगार लोग शहर छोड़कर जा रहे हैं। दिल्ली सहित महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा में सब जगह यही हाल है। महाराष्ट्र में चार मज़दूरों की दुखद मौत हुई है… यूपी के गोरखपुर की ये तस्वीर बेहद मर्मस्पर्शी है।

पलायन रोकने की कोशिश
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर लॉकडाउन घोषित किया गया है। जिसके बाद दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरी का काम करने वाले लोग अपने-अपने गांव की ओर लौटने लगे हैं। हालांकि, मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार जरूरी कदम उठा रही है। खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसे लोगों से अपील की है कि वो जहां रह रहे हैं वहीं रूकें। उनके खान-पीने की हरसंभव व्यवस्था की जाएगी। दिल्ली सरकार की ओर से बनाए गए करीब 800 केंद्रों पर जरूरतमंद लोगों को भोजन वितरित किया जा रहा है।

4 लाख लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था: केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि, सरकार ने 568 स्कूल और 238 शेल्टर होम में रोजाना 4 लाख लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। उन्होंने ये अपील भी की है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रिलीफ कैंप के बारे में बताएं और नजदीकी सेंटर पर लोगों को पहुंचने में उनकी मदद करें। साथ ही उन्हें ये बताएं कि हमने उनके लिए जरूरी व्यवस्थाएं की हैं।

568 स्कूलों और 238 रैन बसेरों में खाने का इंतजाम
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे फ्लाइंट स्कैड प्रत्येक जिले में गश्त कर रहे हैं और जरूरतमंदों को भोजन के पैकेट वितरित कर रहे हैं।करीब 1000 से ज्यादा मोबाइल टीम घूम-घूमकर गली-मोहल्लों में खाना बांट रही हैं। पूरी दिल्ली में इसको लेकर ऐलान भी शुरू कर दिया गया है। रविवार से वितरण प्रक्रिया सुचारू रूप से चलेगी और भोजन हर जगह पहुंचेगा। हमने अपने विधायकों से कहा है कि वो मजदूरों से बात करें, उन्हें दिल्ली छोड़कर नहीं जाने के लिए अनुरोध करें।

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