मध्य प्रदेश में क्या अब ‘कोरोना वायरस’ बचाएगा कमलनाथ की सरकार!

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने पहुंचे हैं. सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार कोरोना वायरस की वजह से 16 मार्च से शुरू हो रहे सत्र को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है. इस बारे में राज्यपाल से बात हो सकती है. सिंधिया समर्थक विधायकों के इस्तीफ़े के बाद से कमलनाथ सरकार अल्पमत में दिख रही है. बीजेपी नेताओं ने भी राज्यपाल से आज मिलने का वक़्त मांगा है. इधर विधानसभा स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने कांग्रेस के इस्तीफ़ा देने वाले 22 विधायकों में से 13 को नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि विधायक आज और कल  उनके सामने उपस्थित हों और बताएं कि उन्होंने अपने मन से इस्तीफ़ा दिया है या किसी के दबाव में. दरअसल ऐसा लग रहा है कि विधानसभा का बजट सत्र आगे बढ़ने में कांग्रेस और कमलनाथ सरकार की भलाई है. क्योंकि सत्र शुरू होते ही बीजेपी सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कह सकती है और नंबर सरकार के पक्ष में नहीं है. जिस तरह से कोरोना वायरस की डर से तमाम तरह के आयोजन और सरकारी कार्यक्रम टाले जा रहे हैं सीएम कमलनाथ भी सत्र को आगे बढ़ाने का विचार कर रहे हैं ताकि इस बीच नाराज विधायकों को मनाने का मौका मिल जाएगा. वैसे भी कांग्रेस बहुमत जुटाने के लिए ज्यादा विधायकों की जरूरत नहीं है. लेकिन बीजेपी भी बहुमत के आसपास है.

गौरतलब है कि कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया नाराज होकर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. सिंधिया का दावा है कि उनके साथ 22 विधायक हैं. फिलहाल सत्तासीन कांग्रेस के कांग्रेस के 114 में से 22 विधायकों ने इस्तीफे दे दिए हैं, और अगर इन्हें स्वीकार कर लिया गया, तो कमलनाथ सरकार का गिर जाना तय है, क्योंकि उस स्थिति में 230-सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 206 रह जाएगी (दो सदस्यों के देहावसान के चलते इस वक्त यह संख्या 228 है), और बहुमत के लिए आवश्यक संख्या 104 रह जाएगी. इस्तीफों के मंज़ूर हो जाने पर कांग्रेस की सदस्य संख्या 92 रह जाएगी, और BJP के पास 107 सदस्य हैं.
इनके अलावा विधानसभा में चार निर्दलीय सदस्य हैं, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के दो विधायक हैं तथा समाजवादी पार्टी (SP) का एक विधायक है, और इन सातों ने फिलहाल कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को समर्थन दिया हुआ है. सो, इस्तीफों के मंज़ूर हो जाने की स्थिति में भी कांग्रेस गठबंधन की ताकत 99 सीटों पर सिमटकर रह जाएगी, जो बहुमत के लिए आवश्यक संख्या से कम होगा.

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