सियासी संकट के बीच कांग्रेस के ‘अपने’ भी इंटेलिजेंस के रडार पर

भोपाल। कमलनाथ सरकार ने अपना किला बचाने के लिए इंटेलिजेंस (खुफिया विभाग) समेत भरोसेमंद अफसरों को भी अभियान में सक्रिय कर दिया है। न केवल विपक्ष की रणनीति पर बल्कि अपने सहयोगियों पर भी खुफिया नजरें टिक गई हैं। एक-एक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। जिला मुख्यालय में एसपीकलेक्टर से लेकर राजधानी में इंटेलीजेंस की टीम को विधायकों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दरअसल, सरकार बनने के साथ ही सभी विधायकों को यह स्पष्ट कर दिया गया था कि वह अपने-अपने क्षेत्र में अपने हिसाब से ट्रांसफर-पोस्टिंग के साथ ही कामधाम कराएंगे लेकिन उनकी यह मंशा पूरी नहीं हो सकी। इस वजह से कांग्रेस के भी कई विधायक असंतुष्ट हैं।

मंत्री न बन पाने का गुस्सा तो कई वरिष्ठ विधायकों को सरकार बनने के साथ ही है। ऐसे में कोई भी दांव खेल सकता है, इसलिए सरकार छूट नहीं देना चाहती है। मुख्यमंत्री कमलनाथ इस ऑपरेशन में ऊपर से पूरी तरह शांत दिख रहे हैं परंतु वह अपने भरोसेमंद टीम के जरिये किसी भी तरह की साजिश विफल करने का खाका तैयार कर चुके हैं। उन्होंने भाजपा के लिए आक्रामक रणनीति बनाई है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के ऑपरेशन के सूत्रधार कहे जाने वाले पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा तो रडार पर हैं ही, उनके कई सहयोगियों की सूची तैयार कर ली गई है। एक दर्जन से ज्यादा भाजपा विधायकों की कमजोर नब्ज के ब्यौरे वाली फाइलें बन गई हैं। कोर्ट के आदेश पर ही सही लेकिन प्रशासन ने तेजी दिखाकर विजयराघौगढ़ के विधायक संजय पाठक के परिवार की आयरन खदान सील कर यह संकेत दे दिया है कि अब साम, दाम, दंड और भेद की रणनीति में सरकार पीछे नहीं रहेगी।

भेदियों की तलाश

कांग्रेस और भाजपा में दोनों तरफ संबंध रखने वाले भी कुछ लोग हैं। ऐसे लोगों की भूमिका को लेकर दोनों तरफ सतर्कता बरती जा रही है। बंधक बनाकर बाहर ले जाए गए विधायकों के बारे में जानकारी देने वाले से लेकर एक-दूसरे की गतिविधियों को साझा करने वाले भी चिन्हित किये जा रहे हैं। इस बीच कांग्रेस की ओर से भाजपा के दर्जन भर विधायकों के अपने संपर्क में होने का दावा भी किया जा रहा है।

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