आदिवासी इलाकों में नए रिसॉर्ट को बार लाइसेंस; सरकार का दावा- पर्यटन बढ़ा तो स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

भोपाल. शराब कारोबार में बड़े समूह लाकर राजस्व बढ़ाने की कोशिशों के बीच मप्र सरकार अब आदिवासी इलाकों से भी पैसा जुटाना चाहती है। नई आबकारी नीति में यह भी तय किया गया है कि नोटिफाइड (अधिसूचित) आदिवासी इलाकों में भी अब नए रिसॉर्ट के लिए बार लाइसेंस दिया जाएगा। इसका शुल्क कितना होगा, यह निर्धारण पर्यटन विभाग की सलाह पर वाणिज्यिक कर विभाग तय करेगा। नेशनल पार्क या टाइगर रिजर्व के आसपास कोई आदिवासी क्षेत्र है तो वहां के रिसॉर्ट यह लागू नहीं होगा।

विभाग का तर्क है कि कई आदिवासी इलाकों में पर्यटन की संभावना है, लेकिन लोग नहीं पहुंच रहे। नए रिसॉर्ट खुलेंगे और बार लाइसेंस दिया जाएगा तो पर्यटन उद्योग बढ़ेगा। इसमें स्थानीय व्यक्ति के लिए रोजगार भी होगा। पिछली कैबिनेट में जब यह मुद्दा आया था, तब जनजातीय मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने विरोध करते हुए कहा था कि आदिवासियों के हाथ से काम छिनेगा। इसी तरह वे फिर भी महुए से शराब बनाते हैं तो पुलिस उन पर केस दर्ज करेगी।

इधर, 2020-21 के लिए नई आबकारी नीति आने के बाद रविवार को सभी आबकारी उपायुक्तों की मीटिंग हुई। विभाग के अपर मुख्य सचिव आईसीपी केशरी सोमवार को कलेक्टरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे, क्योंकि कुछ प्रावधान अब कलेक्टर की सहमति से ही लागू होंगे।
 

शराब बिक्री का समय आधा घंटे तक घटाया

मसलन दो घंटे अतिरिक्त बार, होटल, रिसोर्ट अथवा रेस्टारेंट खोलने के लिए एक दिन का अस्थाई लाइसेंस दिया जाना। साल में 8 दिन अतिरिक्त अनुमति किस दिन दी जाए। बीयर की एक्सपायरी डेट चार माह बढ़ाई बीयर की एक्सपायरी डेट में भी संशोधन किया गया है। अभी शराब की बिक्री सुबह 10 से रात 12 बजे तक होती थी। इसे रात 11.30 बजे कर दिया गया है। कोई दो घंटे और चलाना चाहता है तो आकस्मिक लाइसेंस जारी होगा और प्रतिदिन के हिसाब से 5 हजार रुपए शुल्क लिया जाएगा। 


शराब माफिया की मसीहा कमलनाथ सरकार : भार्गव
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ शांति के टापू मप्र को मदिरा प्रदेश बनाने में जुटे हैं। कांग्रेस ने जनता को शराब मुक्त प्रदेश का वचन दिया था, अब उसके उलट शराब माफिया की संरक्षक बन गई है। शराब नीति में बदलाव कर मुख्यमंत्री उसी 15 साल पहले वाले प्रदेश की तरफ ले जा रहे हैं, जहां से भाजपा सरकार ने प्रदेश को एक प्रगतिशील प्रदेश बनाने की शुरुआत की थी। क्या सरकार के पास सिर्फ शराब ही आय बढ़ाने का जरिया है? मुख्यमंत्री शराब से हटकर भी कुछ सोचें, ताकि प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।


180 मिली की जगह 200 मिली की बोतल होगी
आबकारी विभाग का कहना है कि भारत सरकार यह प्रावधान लाने जा रही है कि 200 मिली से नीचे कोई पदार्थ प्लास्टिक बाॅटल में नहीं मिलेगा। अभी मप्र में 180 मिली देसी शराब प्लास्टिक बाॅटल में मिलती है। मात्रा बढ़ाने से कीमत भी बढ़ेगी।

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