मध्य प्रदेश में कम हुए 1.39 करोड़ राशन कार्ड, कुछ फर्जी तो कुछ ने बदली जगह

इंदौर। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन कार्डों का सर्वे किया गया तो 1.39 करोड़ राशन कार्ड कम करने पड़े। इनमें से कुछ राशन कार्डधारी स्थानांतरित हो गए तो कुछ फर्जी भी हो सकते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके राशन कार्ड तो हैं लेकिन वे राशन लेने नहीं जाते। प्रदेश में कुल 6.68 करोड़ राशन कार्ड थे जिनमें से अब 5.29 करोड़ ही रह गए हैं। बुधवार को इंदौर आए केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जन वितरण राज्य मंत्री रावसाहब पाटिल दानवे ने पत्रकारों से चर्चा में यह बताया। केंद्रीय राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश में गेहूं और चावल का उत्पादन बेहतर है। राज्य में गेहूं और चावल की जितनी खपत होती है, उससे करीब 30 मीट्रिक टन अधिक उत्पादन होता है। इससे पहले केंद्रीय राज्य मंत्री ने भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान विभाग के एपीएस जगन गढ़े और निगम के महाप्रबंधक अभिषेक यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक में खाद्यान्न प्रबंधन, परिवहन, रखरखाव, गोदाम निर्माण अदि पर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि निगम ने मध्य प्रदेश में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। यहां की भंडारण क्षमता 95 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 138 लाख मीट्रिक टन हो गई है।

वन नेशन-वन राशन में मध्यप्रदेश भी शामिल

केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार ने वन नेशन-वन राशन योजना शुरू की है। इसमें अब तक 12 राज्यों को शामिल किया जा चुका है जिसमें मध्य प्रदेश भी शामिल है। योजना के तहत यदि किसी व्यक्ति का राशन कार्ड बना है और वह अपने राज्य से दूसरे राज्य में रहने चला जाता है तो उसे वहां भी इसी राशन कार्ड के आधार पर राशन मिलेगा। उसे नया राशन कार्ड बनवाने की जरूरत नहीं होगी। पहले ऐसा नहीं था।

भंडारण से खराब हुआ 33 प्रतिशत प्याज

प्याज के भाव कभी तो एकदम कम हो जाते हैं और कभी आसमान पर पहुंच जाते हैं। इस विसंगति को सरकार दूर नहीं कर सकती क्या? कीमतों पर नियंत्रण के लिए इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू नहीं किया जा सकता? इस सवाल पर केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि प्याज जल्द खराब होने वाला खाद्य पदार्थ है। सरकार कीमतों पर नियंत्रण के प्रयास करती है, लेकिन यह मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है। इस साल भंडारण में 33 प्रतिशत प्याज खराब हो गया। इस कारण हमें आयात भी करना पड़ा।

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