निर्वाचन आयोग ने सियासी दलों पर कसी नकेल, सोशल मीडिया पर खर्च अब चुनावी व्यय में शामिल

नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़ी नज़र रखने का फैसला किया है. फेसबुक, ट्विटर और यू -ट्यूब जैसी कंपनियों को निर्देश जारी किया गया है कि वे राजनीतिक विज्ञापन और राजनीतिक दलों की तरफ से रखे जा रहे कंटेट पर सख्ती से नज़र रखें.
लोकसभा चुनाव को लेकर चुनावी अभियान तेज़ हो रहा है. सबसे ज़्यादा चुनावी सक्रियता सोशल मीडिया मंचों पर दिख रही है. अब इस मंच के दुरुपयोग को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने कोड आफ कंडक्ट जारी कर दिया है.
सोशल मीडिया को लेकर चुनाव आयोग (EC) के निर्देश
नामांकन दाखिल करने के दौरान उम्मीदवारों को सोशल मीडिया एकाउंट्स की जानकारी देनी होगी.
सोशल मीडिया पर सभी राजनीतिक विज्ञापनों का प्री-सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा.
चुनाव आयोग ने गूगल, फेसबुक, ट्वीटर और यू-ट्यूब को राजनीतिक दलों के विज्ञापनों को वेरिफाई करने को कहा.
सोशल मीडिया पर विज्ञापनों पर खर्च को चुनावी खर्च का हिस्सा माना जाएगा.
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल एडवर्टाइजमेंट को रेगुलेट करने के लिए चुनाव आयोग ने जो दिशानिर्देश और आचार संहिता लागू की है उसको हम भी मानेंगे और सभी को मानना चाहिए. लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया का एंटी सोशल इस्तेमाल न हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
कांग्रेस के प्रवक्ता प्रणव झा ने कहा है कि चुनाव आयोग को ये निर्दश काफी पहले जारी करने चाहिए थे. सिर्फ निगरानी से सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकना संभव नहीं होगा.
इंडियन सोशल मीडिया कंपनी शेयरचैट को चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि वह तीन घंटे के अंदर किसी भी आपत्तिजनक कन्टेंट को ऐप से निकाल दें. एनडीटीवी से बातचीत में शेयरचैट के पब्लिक पालिसी हेड बर्जेज़ मालू ने ये बात कही.
शेयरचैट चुनावों के दौरान अपने ग्राहकों की गतिविधियों पर नज़र रखेगा. आपत्तिजनक कन्टेंट डालने के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है. 300 से अधिक बीजेपी, कांग्रेस और आंध्र-तेलंगाना के नेता शेयरचैट पर सक्रिय हैं. शेयरचैट 24 घंटे ग्राहकों की गतिविधियों पर नज़र रख रहा है. महाराष्ट्र के सीएम फडनविस और बीजेपी नेता मनोज तिवारी के सबसे ज़्यादा फोलोअर्स हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *