मप्र में सिंधिया समन्वय की सियासी राह पर

संदीप पौराणिक
भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का सियासी अंदाज बदल रहा है और वे समन्वय की राजनीति की राह पर चल रहे हैं। सिंधिया का मध्यप्रदेश का मौजूदा दौरा उसी तरफ इशारा भी कर रहा है। सिंधिया राजघराने का सियासी क्षेत्र ग्वालियर-चंबल को माना जाता रहा है। वे ही नहीं, उनके परिजन भी इस क्षेत्र से संसद और विधानसभा में पहुंचते रहे हैं। ज्योतिरादित्य और उनके पिता माधवराव सिंधिया ग्वालियर, गुना से सांसद चुने जाते रहे तो उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया व दादी विजया राजे भी इसी क्षेत्र से निर्वाचित होती रहीं। यशोधरा इस समय शिवपुरी से भाजपा की विधायक हैं।
राज्य की सियासत में सिंधिया को एक खास गुट का नेता माना जाता रहा है, मगर अब वे इस छवि को तोडऩा चाहते हैं। इसके लिए वे दूसरे गुटों से नाता रखने वाले नेताओं से भी करीबी रिश्ते रखना चाहते हैं। इसी क्रम में वे राज्य के पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे के निवास पर नाश्ते के लिए पहुंचे। पांसे की गिनती मुख्यमंत्री कमल नाथ के करीबियों में होती है। पांसे के आवास में नाश्ते की टेबल पर सिंधिया के साथ राज्य सरकार के कई और मंत्री भी थे, जो दूसरे गुटों में गिने जाते हैं। पांसे के आवास पर आने को लेकर पूछे गए सवाल पर सिंधिया ने कहा, ‘मेरा और पांसे का परिचय काफी पुराना है, वे मराठा हैं, उनका आग्रह था तो उनके घर पर आया।Ó वहीं पांसे भी सिंधिया के दौरे को किसी राजनीति से जोडऩा उचित नहीं समझते। उनका कहना है कि सिंधिया पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए उन्हें आमंत्रित किया। कांग्रेस में सभी एकजुट हैं और सभी का एक ही मकसद है, सरकार के जरिए जनता के लिए काम करना। सिंधिया गुरुवार की रात को अपने समर्थक और राज्य के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निवास पर आयोजित रात्रिभोज में शामिल हुए थे, उसके बाद कमल नाथ समर्थक मंत्री पांसे के आवास पर भी गए। इस डिनर और ब्रेकफास्ट को भी राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस नेता सिंधिया के चार दिवसीय दौरे के राजनीतिक मायने खोजे जा रहे हैं, क्योंकि इससे पहले उनकी पार्टी की प्रमुख सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात हुई थी। साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा के लिए उन्हें बड़ा दावेदार माना जा रहा है। सिंधिया ने उनके दौरे को सियासत का हिस्सा बताए जाने संबंधी सवाल पर संवाददाताओं से कहा, ‘यह मेरा राज्य है, मैं यहां के लोगों से मिलने आया हूं। अपने राजनीतिक जीवन में मैंने कभी भी पद की अभिलाषा नहीं की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंधिया राज्य की सियासत में अपना प्रभाव बढ़ाने के साथ सभी के बीच स्वीकार्यता बढ़ाने के मकसद से दूसरे गुटों से जुड़े नेताओं से भी मेल-मुलाकात बढ़ा रहे हैं। गोविंद सिंह राजपूत के निवास पर आयोजित रात्रिभोज में सभी गुटों से नाता रखने वाले नेताओं से उन्होंने काफी गप-शप की, तो कमल नाथ के करीबी मंत्री पांसे के निवास पर नाश्ते के लिए गए। पांसे के निवास पर हुआ आयोजन मुख्यमंत्री की सहमति से ही हुआ होगा। इससे एक संदेश तो गया ही कि मुख्यमंत्री की सिंधिया से कोई दूरी नहीं है। वहीं, सियासत में कुछ पक रहा है, इसका भी यह संकेत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *