पदोन्नति में आरक्षण का रास्ता खुलवाने सुप्रीम कोर्ट में सशर्त अनुमति मांगेगी मप्र सरकार

भोपाल। तीन साल से बंद पदोन्नति का रास्ता खुलवाने के लिए कमलनाथ सरकार सुप्रीम कोर्ट से सशर्त अनुमति देने की मांग रखेगी। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने यथास्थिति को स्थगन में तब्दील कराने का आवेदन सुप्रीम कोर्ट में लगाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया है। पदोन्न्ति में आरक्षण मामले की सुनवाई नए साल में 28 जनवरी को होनी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार पदोन्नति में आरक्षण नियम रद्द होने के बाद रुकी प्रक्रिया को शुरू करने सुप्रीम कोर्ट से सशर्त अनुमति चाहती है। इसके लिए पहले भी प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक ये सफल नहीं हुए हैं।

कमलनाथ सरकार ने मामले का हल जल्द निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जल्दी-जल्दी सुनवाई कराने के लिए व्यवस्था में भी बदलाव किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह को इस प्रकरण से जोड़ा गया है। वहीं, प्रभारी अधिकारी प्रमुख अभियंता आरके मेहरा को भी बदलकर आवासीय आयुक्त कार्यालय नईदिल्ली में पदस्थ अपर आवासीय आयुक्त प्रकाश उन्हाले को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा कोर्ट में कर्मचारियों की पदोन्नति अवरुद्ध होने से कार्यकुशलता पर पड़ रहे प्रभाव को मजबूती के साथ रखने की तैयारी भी की गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में इस बार पूरी कोशिश यथास्थिति को स्थगन में तब्दील कराने की होगी। इसके साथ ही यह भी मांग रखी जाएगी कि प्रदेश सरकार को सशर्त पदोन्नति करने की अनुमति दे दी जाए जो सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। इसके लिए कर्मचारियों से शपथपत्र भी लिए जा सकते हैं।

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