झारखंड में हार के बाद राज्यसभा में भी बिगड़ सकता है भाजपा का गणित, जानिए क्या कहते हैं आंकड़े

झारखंड चुनाव परिणाम के चलते भाजपा को इसका खामियाजा राज्यसभा चुनाव में भी उठाना पड़ सकता है, और इसकी आशंका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए साल 2024 में जब लोकसभा चुनाव में जाएगा तब पार्टी के पास प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट भी न बचे।
नई दिल्ली |
झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इसमें सत्तापक्ष रघुवर दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को करारा झटका लगा है। चुनाव में पार्टी सत्ता के साथ राज्य में सबसे बड़ी पार्टी का तमगा भी गंवा बैठी। सोमवार (23 दिसंबर, 2019) घोषित हुए नतीजों में भाजपा प्रदेश की 81 सीटों में से महज 25 सीटें जीत सकी, जबकि मुख्य विपक्षी दल जारखंड मुक्ता मोर्चा ने 30 जीतीं। जेएमएम संग गठबंधन में लड़ रही कांग्रेस ने 16 और आरजेडी ने एक सीटों पर जीत दर्ज की।

चुनावी परिणाम के चलते भाजपा को इसका खामियाजा राज्यसभा चुनाव में भी उठाना पड़ सकता है, और इसकी आशंका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए साल 2024 में जब लोकसभा चुनाव में जाएगा तब पार्टी के पास प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट भी न बचे। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक आंकड़े बताते हैं कि अगर झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) राज्यसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देने का फैसला करती है तो समीकरण बदल सकते हैं और पार्टी उच्च सदन में अपनी मौजूदा स्थिति को बनाए रख सकती है। झारखंड विधानसभा चुनाव में जेवीएम ने भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन बहुमत में नहीं है मगर पार्टी संशोधित नागरिकता कानून, जम्मू-जम्मू कश्मीर पुनर्गठन एक्ट को अमलीजामा पहनाने में सक्षम है। ऐसा इसलिए है कि विपक्ष में मुख्य विपक्ष दल के अलावा अन्य दल भी हैं जो किसी धड़े में नहीं हैं। इनमें कुछ दलों का समर्थन लेने में भाजपा कामयाब रही थी।

उल्लेखनीय है कि झारखंड में राज्यसभा की छह सीटें हैं। इनमें तीन सीटें भाजपा और एक-एक सीट कांग्रेस और आरजेडी के पास है। छठी सीट पर निर्दलीय उद्योगपति परिमल नाथवानी का कब्जा है। झारखंड में साल 2020, 2022 और 2024 में दो-दो साल के अंतराल पर दो-दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है, ऐसे में भाजपा और सत्तापक्ष और जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा। खास बात है कि राज्य चुनाव परिणाम ने राज्यसभा अंक गणित को खासा पेचीदा बना दिया है।

दरअसल विधानसभा या लोकसभा (जहां जनता अपना नेता चुनती है) चुनाव के उलट राज्यसभा चुनाव में विधायक अपना उम्मीदवार चुनते हैं।

ऐसे समझें पूरा गणित
झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं। ऐसे में राज्यसभा तक पहुंचने के लिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों का समर्थन मिलना जरूरी है। मौजूदा समय में भाजपा के पास महज 25 विधायक हैं। जेएमएम गठबंधन के पास 47 विधायकों का समर्थन है। इसके अलावा अधिकतर ऐसे दूसरे दल भी हैं जो भाजपा की अपेक्षा जेएमएम गठबंधन के ज्यादा करीब हैं। इसका मतलब है कि झारखंड में हर दूसरे साल में राज्यसभा के लिए वाले चुनाव में भाजपा के पास जरुरी संख्या ना होने के चलते एक-एक सीटें जाने का खतरा मंडरा रहा है।

राज्यसभा चुनाव में भाजपा किसी तरह जेवीएम को अपने पाले में लाने में कामयाब रहती है तो समीकरण बदल सकते हैं। दोनों पार्टियों के विधायकों की संख्या को मिला ले तो 25+3 = 28 बैठता है और 2024 तक पार्टी अपनी तीन सीटों पर कब्जा बरकरार रख सकती है। अगर जेवीएम भाजपा से दूरी बरकरार रखती है तो भगवा पार्टी के पास अपनी पुरानी स्थिति को बनाए रखने में काफी मुश्किल होगी।

जानना चाहिए की राज्यसभा चुनाव में जेएमएम गठबंधन आराम से पहली राज्यसभा सीट जीत लेगा और इसके अतिरिक्त उसके 19 विधायक और बचे रहेंगे। इसके लिए पार्टी को अन्य विधायकों के समर्थन की जररुत होगी।

दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए ने साल 2021 तक ऊपरी सदन में बहुमत हासिल करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में भाजपा अगर झारखंड से एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं रही तो उसके लक्ष्य को झटका लग सकता है।

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