ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल का सीएम का सपना पीएचई मंत्री पांसे ने किया साकार

ग्रामीण अंचलों में घर-घर तक नल से जल पहुंचाने 68 हजार करोड़ की कार्ययोजना तैयार
बैतूल। देश की आाजदी के लगभग सात दशकों के दौरान आमजन की मूलभूत जरूरत शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अनेको योजनाए बनाई गई… योजनाओं के क्रियान्वयन पर अरबो-खरबो की धनराशि खर्च भी हुई परंतु शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद ग्रामीण आबादी पानी को तरसती देखी जाती है। एक वर्ष पूर्व म.प्र. के मुख्यमंत्री की कमान संभालने के बाद कमलनाथ ने म.प्र. के ग्रामीण अंचलों में निवासरत लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की अवधारणा को सरकार की प्रमुख प्राथमिकता में शामिल किया था। मुख्यमंत्री श्री नाथ की उक्त पवित्र मंशा को म.प्र. के पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे ने महज एक वर्ष की अल्प अवधि में ही साकार रूप प्रदान किया है। म.प्र. की ग्रामीण आबादी को भरपूर शुद्ध जल की उपलब्धता की मुख्यमंत्री की मंशा को साकार रूप प्रदान करने के लिए पीएचई मंत्री श्री पांसे ने केवल राइट टू वाटर एक्ट का ड्राफ्ट तैयार करवाया बल्कि समूचे म.प्र. के ग्रामीण अंचलों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए 68 हजार करोड़ रुप की विस्तृत कार्ययोजना भी बनवाई। यह बात म.प्र. में कमलनाथ सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने की पूर्व संध्या पर म.प्र. के पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे ने दैनिक राष्ट्रीय जनादेश के साथ विशेष चर्चा में कही।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की अवधारणा को अमलीजामा पहनाते हुए प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में हर घर नल से जल योजना लागू कर दी गई है। जिसके बाद अब ग्रामीण अंचलों की माता-बहनों को पानी के लिए नदी-तालाब, कुंए, बावड़ी के चक्कर लगाने से मुक्ति मिल गई है। म.प्र. के पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे के मुताबिक पानी अमजन की मूलभूत आवश्यकता है इसलिए मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की जनता को पानी का कानूनी अधिकार देने के लिए राइट टू वाटर एक्ट का जनहितैषी कान्सेप्ट लाया गया। पीएचई मंत्री के मुताबिक राज्य सरकार ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में राइट टू वाटर एक्ट का ड्राफ्ट तैयार किया गया। इस कानून को लागू करने के लिए एक हजार करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने बताया कि आगामी बजट सत्र में यह एक्ट पारित करवाकर लागू कर दिया जाएगा। पीएचई मंत्री श्री पांसे के मुताबिक राइट टू वाटर एक्ट लागू होने पर मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा जहां आमजन को पानी का कानूनी अधिकार मिलेगा। इतना ही नहीं यह एक्ट सरकारी कानून न होर जनता का कानून होगा। पीएचई मंत्री श्री पांसे के मुताबिक राइट टू वाटर एक्ट में जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों को बड़े अभियान के रूप में क्रियान्वित किया जाएगा। इस कानून से प्रदेश के सभी जलस्त्रोतों नदी, तालाबों सहित परंपरागत कुएं, बावड़ी को सुरक्षित कर स्थायित्व दिया जाएगा।
22 हजार करोड़ की 45 योजनाओं की डीपीआर तैयार
म.प्र. के पीएचई मंत्री श्री पांसे ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा प्रदेश की जनता के हित में जिस तेज रफ्तार से ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी निर्णय लिए जा रहे हैं उसी रफ्तार से सीएम ने निर्णयों का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण अंचलों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए 68 हजार करोड़ रुपए की विस्तृत कार्ययोजना बनाई जा चुकी है। अभी तक 19 समूह नलजल योजनाएं पूर्ण कर 802 ग्रामों की 11 लाख से अधिक आबादी को घरेलू नल कनेक्शन द्वारा जल प्रदाय शुरू कर दिया है। पीएचई मंत्री के मुताबिक 6 हजार 672 करोड़ रुपए लागत की 39 समूह जल योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। आगामी दो वर्षों में उक्त योजनाओं के पूर्ण होने पर 6091 ग्रामों की लगभग 64 लाख आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि म.प्र. के 14 हजार 510 ग्रामों की एक करोड़ आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 22 हजार 484 करोड़ रुपए की 45 समूह जल प्रदाय योजनाओं की डीपीआर तैयार की जा चुकी है।
एक वर्ष में 6 हजार हैण्डपंप स्थापित किए
पीएचई मंत्री श्री पांसे ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। परिणाम स्वरूप एक वर्ष के दौरान ग्रामीण अंचलों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा व्यापक पैमाने पर कार्य किए गए। एक वर्ष के दौरान ग्रामीण अंचलों में 6 हजार से अधिक हैण्डपंप स्थापित किए गए तथा 600 से अधिक नवीन नल जल योजनाओं के कार्य पूर्ण कर पेयजल सप्लाई शुरू की गई। इतना ही नहीं पेयजल उपलब्धता के लिए 6700 से अधिक सिंगल फेस पंप स्थापित किए गए। पीएचई मंत्री श्री पांसे ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान बंद पड़ी लगभग तीन हजार नलजल योजनाओं को चालू किया गया था। ग्रामीण इलाकों में बंद पड़े तीन लाख 12 हजार हैण्डपंपों को सुधार कार्य कर चालू करवाया गया। साथ ही 65 हजार हैण्डपंपों में तीन लाख मीटर राइजर पाइप बढ़ाकर या आवश्यकता अनुसार बदलकर उन्हें चालू किया गया।
बेहतर प्लानिंग के लिए तकनीकी का इस्तेमाल
पीएचई मंत्री श्री पांसे ने बताया कि पेयजल प्रदाय योजनाओं की बेहतर प्लानिंग के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन एवं मॉनीटरिंग में बेहतर तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कड़ी में आईआईटी दिल्ली से करार किया गया है। पीएचई मंत्री के मुताबिक मैप आईटी के माध्यम से विभागीय कार्यों के अनुबंधों के अनुश्रवण के लिए ऑनलाइन साफ्टवेयर बनाने की प्रक्रिया प्रचलन में है। उन्होंने बताया कि स्थापित नलजल योजनाओं के संचालन के अनुश्रवण और संबंधित ग्राम पंचायतों की संचालन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पोर्टल तैयार कराया जा रहा है। साथ ही नल जल योजनाओं में विद्युत खपत की रियल टाईम मानीटरिंग के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। जल निगम में ई टेंडरिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। पीएचई मंत्री श्री पांसे का कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की मंशा को ेजमीनी स्तर पर साकार करने के लिए बीते एक वर्ष के दौरान पीएचई विभाग द्वारा एक अभियान के रूप में किए जा रहे सतत् प्रयासों से म.प्र. की एक लाख 28 हजार 231 ग्रामीण बसाहटों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित कराने के सुखद परिणाम मिलने लगे हैं।
जलगुणवत्ता में नंबर वन
पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे बताते हैं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की मंशा है कि प्रदेश की जनता को पानी की भरपूर उपलब्धता के साथ ही शुद्ध पानी मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जल गुणवत्ता जांचने वाली प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक उपकरणों एवं तकनीकी स्टाफ से लैस कर उनका सुदृढ़ीकरण किया गया। एक वर्ष की अल्प अवधि में किए ठोस और सार्थक प्रयासों से म.प्र. की जलगुणवत्ता देश में नंबर वन आयी है। पीएचई मंत्री श्री पांसे ने बताया कि भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रयोगशालाओं में जल गुणवत्ता की जांच के लिए निर्धारित 14 मापदण्डों में मध्यप्रदेश को प्रथम रैकिंग मिली है। म.प्र. को आईएस 10500-2012 के तहत पहला स्थान दिया गया है। इतना ही नहीं म.प्र. की मुरैना, भिण्ड, गुना, शाजापुर, मंदसौर, पन्ना, मंडला और सागर जिले सहित मुख्यालय की प्रयोगशालाओं ने टॉपटेन में स्थापित किया है।
विकास के लिए ऐतिहासिक क्रांतिकारी निर्णय ले रहे सीएम: पांसे
म.प्र. के पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे का कहना है कि म.प्र. के चौमुखी विकास और प्रदेश की जनता के हित में मुख्यमंत्री कमलनाथ ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी निर्णय ले रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा लिए जा रहे निर्णयों एवं जमीनी स्तर पर निर्णयों का तेज रफ्तार से क्रियान्वयन होने का असर प्रदेश सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में नजर आने लगा है। पीएचई मंत्री श्री पांसे ने कहा कि 15 वर्षों के भाजपा के कार्यकाल में योजनाएं एवं विकास कार्य सिर्फ कागजों पर ही नजर आए, जमीन पर काम नहीं हुआ। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के विकास के साथ ही प्रदेश की जनता की खुशहाली की चिंता करते हुए विकास कार्यों और योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन करवाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने किसानों का कर्जा माफ, बिजली बिल हॉफ करने के साथ ही आमजन को सस्ती बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है। पीएचई मंऋत्री श्री पांसे के मुताबिक मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में बैतूल जिले सहित समूचे प्रदेश में विकास रफ्तार पकड़ चुका है। उन्होंने कहा कि कृषि, उद्योग, ग्रामीण विकास, रोजगार सहित अन्य क्षेत्रों में आगामी दिनों में क्रांतिकारी एवं ऐतिहासिक परिवर्तन नजर आने लगेगा।

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