सात देशों के आईआईटी छात्रों ने देखी बाचा के ग्रामीणों की एकता

जल महोत्सव देख हुए अभिभूत, सौर्य ऊर्जा के उपयोग की प्रशंसा
बैतूल। मात्र 73 आदिवासी परिवारों के गांव बाचा में ग्रामीणों की एकता, संगठन क्षमता, स्वच्छता, जल प्रबंधन और सौर्य ऊर्जा का बेहतर उपयोग का अध्ययन करने शुक्रवार को एशियन यूनिवर्सिटी एलाइंस के 14 आईआईटी छात्रों का दल पहुंचा। इस दल में आईआईटी मुम्बई के चार छात्रों के साथ ही हुवेई की तसिंधु यूनिवर्सिटी जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी, मलेरिया की मलाया यूनिवर्सिटी, कनाकिस्तान की नजरबायेब यूनिवर्सिटी, दक्षिण कोरिया की सीओल यूनिवर्सिटी और सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के आईआईटी विद्यार्थियों शामिल थे।
अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों के दलने ग्राम बाचा के प्रत्येक घर में लगे सौर्य ऊर्जा संयंत्र, सोखपिट टैंक, कचरा के डिब्बे देखने के साथ ही ग्रामीणों का बिना किसी शासकीय मदद से श्रमदान कर जल प्रबंधन देखकर अभिभूत हुए। इन शोधार्थी विद्यार्थियों का कहना है कि भारत के एक छोटे से आदिवासी ग्राम से विश्व को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। हम अपने देश में भी बाचा गांव जैसे गांव बनाने का प्रयास करेंगे।
सात देशों से आए आईआईटियन
नदी-नालों में बहते पानी को रोकने के लिए गाँव-गाँव में मनाये जा रहे जल महोत्सव के अन्तर्गत शुक्रवार घोड़ाडोंगरी विकासखण्ड के ग्राम बाचा में बोरी बन्धान बनाकर गाँव की नदी का पानी रोका गया। इस अभियान को देखने के लिए भारत सहित विश्व के सात देशों के आईआईटी और विश्वविद्यालयों के शोधार्थी छात्र भी सुबह से बाचा ग्राम पहुँच गए थे। आज बाचा में मानों त्यौहार जैसा वातावरण था। ग्राम की महिलाओं ने सड़कों को स्वच्छ कर रंगोली बनाई गई । युवाओं ने अतिथियों के स्वागत की व्यवस्था की । बोरी बन्धान की तैयारी भी एक सप्ताह से की जा रही थी । बाचा के ग्रामवासी इसलिए अधिक प्रसन्न थे कि उनके आदर्श ग्राम को देखने विदेश से लोग आ रहे थे।
ढोल-ढमाकों से किया छात्रों का स्वागत
शुक्रवार सुबह जैसे ही अतिथियों ने ग्राम में प्रवेश किया सभी ने परम्परागत ढंग से ढोल-ढमाकों से उनका स्वागत किया। पूरे ग्रामवासियों और अतिथियों ने नदी का पूजन कर बोरी बन्धान का श्रीगणेश किया। तीन घण्टे के अथक परिश्रम से नदी के किनारों तक की ऊँचाई तक बन्धान बनाया। इस बन्धान से कम से कम पच्चीस एकड़ के क्षेत्र में रबी की सिंचाई होगी।
इन्होंने की सहभागिता
बोरी बन्धान में ग्रामवासियों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष सुरजलाल जावलकर, जनजाति शिक्षा के राष्ट्रीय सह संयोजक बुधपाल सिंह ठाकुर, भारत भारती के सचिव व गंगावतरण अभियान के संयोजक मोहन नागर, जनजाति शिक्षा के जिला प्रमुख नागोराव सिरसाम, जनपद सदस्य रूमी बाई दल्लू सिंह धुर्वे, ग्राम सरपंच राजेन्द्र कवड़े, संकुल प्रमुख मिथिलेश कवड़े, उप संकुल प्रमुख अनिल उइके, संजू कवड़े , हीरालाल उइके, योगेंद्र उइके, शरद सिरसाम, सुखदेव कवड़े, रोशन काकोडिया, सचिव संजीव नामदेव, इंजीनियर खुशबू ब्रह्मे, पाढर भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेश परते, छोटे लाल धुर्वे सरपंच डोली ढाना, सहित आसपास के ग्रामों ग्रामीणजनों ने सहभागिता की। विदेशी छात्रों में भी बोरी बन्धान में हाथ बटाया व बाचा ग्रामवासियों के कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
की जाएगी जैविक खेती
इस अवसर पर आयोजित ग्रामसभा को सम्बोधित करते हुए भारत भारती के सचिव मोहन नागर ने कहा कि आजे बाचा ग्राम को देखने के लिए देश-विदेश लोग आ रहे हैं। क्योंकि यहाँ के ग्रामवासियों ने अपनी मेहनत से ग्राम को आदर्श ग्राम बनाया है। यहाँ की स्वच्छता, जल प्रबंधन, सोर ऊर्जा का उपयोग हर गाँव के लिए अनुकरणीय है। श्री नागर ने कहा कि बाचा में शीघ्र ही बिना रासायनिक खादों का उपयोग किए

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