कौन होगा प्रदेश में भाजपा का नया मुखिया, गरमाने लगी सियासत

भोपाल। संगठन चुनाव की प्रकिया के आखिरी दौर में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेशाध्यक्ष को लेकर सियासत गरमा गई है। जिलाध्यक्षों के चुनाव 30 नवंबर को होने के तत्काल बाद प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव की गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए दावेदारों ने जोर-आजमाइश भी शुरू कर दी है। मौजूदा अध्यक्ष राकेश सिंह ही पार्टी के अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे या कोई नया चेहरा प्रदेश की कमान संभालेगा, इसे लेकर कयासबाजी भी खूब चल रही है। सियासतदार कह रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अब तक प्रदेशाध्यक्ष को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, अगर दोनों के बीच कोई समन्वय हो गया तो प्रदेशाध्यक्ष पद के चुनाव में तस्वीर बदल भी सकती है।

दरअसल, भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष के कई दावेदार हैं और वे अपने समीकरण भी बैठा रहे हैं। सागर संभाग से पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह भी प्रदेशाध्यक्ष के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह एक ही जिले व एक ही संभाग से आते हैं पर इसके लिए तर्क दिए जा रहे हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दोनों ही एक राज्य से हैं।

भूपेंद्र सिंह को चौहान और तोमर दोनों का ही करीबी माना जाता है। संघ की पसंद के चलते खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा का नाम भी दौड़ में शामिल है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इधर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा पहले भी अध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए वे भी दावा ठोक रहे हैं।

किसकी-क्या संभावना

राकेश सिंह की हो सकती है पुनरावृत्ति

राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से नजदीकियों के चलते संभावना है कि राकेश सिंह को ही दोबारा मौका मिल जाए। चूंकि राकेश सिंह को अधूरा कार्यकाल मिला था, इसलिए संभावना है कि पार्टी उन्हें एक मौका और दे। मोदी कैबिनेट में मंत्री पद नहीं देने के पीछे यही तर्क दिया जा रहा है कि पार्टी उन्हें संगठन में ही रखना चाहती है।

साझा प्रत्याशी बन सकते हैं भूपेंद्र सिंह

पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की साझा पसंद बन सकते हैं। वरिष्ठता के लिहाज से भी वे सांसद होने के साथ ही संगठन के कई पदों पर रह चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष ब्राह्मण होने के कारण सिंह के साथ जातिगत संतुलन बैठाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

प्रभात झा भी ठोक रहे दावेदारी

झा पहले प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में काम करने का बेहतर अनुभव है। प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए सर्वाधिक दौरे किए। फिलहाल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। संघ नेताओं के करीबी होने के कारण दावेदारी मजबूत है पर उम्र बंधन के कारण दौड़ से बाहर हो सकते हैं।

नरोत्तम मिश्रा हाईकमान के भरोसे

पूर्व मंत्री मिश्रा हाईकमान के भरोसे प्रदेशाध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे हैं। लंबे समय तक प्रदेश में मंत्री रहे। पहले भी प्रदेशाध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष पद के भी दावेदार थे।

वीडी शर्मा संघ की पसंद

संघ पृष्ठभूमि के चलते सीधे लोकसभा चुनाव का टिकट मिला और सांसद बने। संघ की खास पसंद माने जाते हैं। फिलहाल प्रदेश संगठन में भी महामंत्री हैं। विद्यार्थी परिषद में काम करने के कारण संगठन का बेहतर अनुभव है।

हाईकमान के करीबी कैलाश विजयवर्गीय

मालवा से प्रबल दावेदार हैं, मंत्री पद छोड़कर संगठन का काम संभाला। राष्ट्रीय महासचिव हैं। फिलहाल पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं। लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम भी दिए। हाईकमान के भी करीबी हैं।

– संगठन चुनाव अपने अगले पड़ाव पर है। 30 नवंबर को जिलाध्यक्ष का चुनाव होना है। तत्पश्चात प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव होगा। संगठन की गाइडलाइन के मुताबिक कोई सामान्य कार्यकर्ता भी प्रदेशाध्यक्ष हो सकता है। – डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे, मप्र प्रभारी व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा

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