बदले जाएंगे भाजपा शासनकाल से जमे मैदानी पुलिस अधिकारी

भोपाल। प्रदेश में करीब एक दर्जन मैदानी पुलिस अधिकारी अभी ऐसे हैं जिनकी पदस्थापना भाजपा शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने अपने एक साल के कार्यकाल में कई प्रशासनिक फेरबदल किए, लेकिन इन अफसरों के प्रभार नहीं बदले गए। इनमें से एक अधिकारी के खिलाफ तो कांग्रेस के कुछ असरदार नेताओं के बीच तनातनी की स्थिति तक बन चुकी है। अब इन अधिकारियों सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के कुछ अफसरों के तबादले की संभावना जताई जा रही है। नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के मद्देनजर इन अधिकारियों की तबादले हो सकते हैं। भाजपा की शिवराज सरकार के समय मैदानी पदस्थापना पाने वाले पुलिस अधिकारियों में सबसे पुराने सागर आईजी सतीश सक्सेना हैं, जिन्हें शिवराज शासन में सितंबर 2016 में पदस्थ किया गया था।

इनके बाद शिवराज सरकार ने डीआईजी बीएस चौहान को दिसंबर 2016 में पदस्थ किया था। इसी तरह शिवराज शासनकाल में ही उज्जैन एसपी सचिन अतुलकर की जुलाई 2017 में पदस्थापना की गई थी। बताया जाता है कि आईजी सक्सेना दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में उनके स्टाफ में पदस्थ रहे थे।

विधानसभा चुनावी वर्ष 2018 में जनवरी में डीआईजी होशंगाबाद आरए चौबे व डीआईजी छतरपुर अनिल माहेश्वरी की तत्कालीन सरकार ने सबसे पहले पदस्थापना की थी। इसके बाद मई 2018 में हुए परिवर्तन में आईजी बालाघाट केपी वैकेंटश्वर राव व आईजी उज्जैन राकेश गुप्ता, डीआईजी रीवा अविनाश शर्मा व डीआईजी शहडोल पीएस उइके, एसपी ग्वालियर नवनीत भसीन व एसपी भिंड रुडोल्फ की पदस्थापना हुई थी। इनके अलावा छिंदवाड़ा एसपी से विवादों में आए गौरव तिवारी जुलाई 2018 में रतलाम एसपी बनाए गए तो अक्टूबर 2018 में एसपी निवाड़ी मुकेश कुमार श्रीवास्तव बना दिए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले होने वाले संभावित प्रशासनिक फेरबदल में कई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों के साथ इन अधिकारियों की पदस्थापना में भी परिवर्तन किया जा सकते हैं। एसपी के लिए अभी 2009, 2013 व 2014 बैच के आईपीएस अधिकारियों की पदस्थापना की अटकलें लगाई जा रही हैं तो मैदानी डीआईजी व आईजी पदों के लिए कुछ प्रमोटी अधिकारी प्रयासरत हैं। डीआईजी होशंगाबाद चौबे मार्च 2020 और डीआईजी शहडोल उइके नवंबर 2020 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे इनकी पदस्थापनाएं बदले जाने की संभावना कम है।

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