आदिवासी क्षेत्रों में बैंक शाखाएं बंद होने से मध्यप्रदेश सरकार नाराज

भोपाल। विभिन्न् बैंकों द्वारा सरकार को बताए बिना आदिवासी क्षेत्रों में बैंक की शाखाएं बंद करने को लेकर मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती ने खासी नाराजगी राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में जाहिर की। उन्होंने बैंकर्स से पूछा कि आपने ऐसे-कैसे शाखाएं बंद कर दी। हम वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं और इस तरह से शाखाएं बंद होने से बुरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने चेताया कि भविष्य में ऐसा कोई भी कदम लीड बैंक के राज्य प्रमुख, समिति और आयुक्त संस्थागत वित्त की समीक्षा के बाद ही उठाया जाए। बैठक में नाबार्ड के अधिकारियों ने किसानों में व्यापारिक समझ विकसित करने की रणनीति पर जोर देने की बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि वे किसानी ही करते रह गए तो विकास नहीं हो पाएगा। इन्हें व्यापारी बनाना है।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के आंचलिक कार्यालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने वित्तीय साक्षरता के लिए व्यापक स्तर पर शिविर लगाने के निर्देश देते हुए कहा कि इसमें बैंक और सरकार के अधिकारी मौजूद रहें। उन्होंने किसानों द्वारा किए जा रहे नवाचारों को बैंकों द्वारा कर्ज नहीं देने पर भी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि हमें बड़े नजरिए से चीजों को देखना होगा। आप गुजरात या महाराष्ट्र चले जाएं तो वहां किसान काफी नवाचार कर रहे हैं और बैंक उन्हें प्रोत्साहित भी करते हैं लेकिन यहां ऐसा नहीं है। निजी बैंक तो इस मामले में थोड़े सकारात्मक भी हैं पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को रवैया ठीक नहीं है। बैठक में शैक्षणिक कर्ज देने में कंजूसी बरते जाने का मुद्दा भी उठा। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने रतलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई के लिए बैंक मैनेजर ने कर्ज नहीं दिया।

दरअसल, उन्हें नियमों के बारे में पता ही नहीं था। दो साल तक छात्र को बैंक चक्कर कटवाता रहा। जब शासन से जानकारी भिजवाई गई तो फिर ऋ ण स्वीकृत हुए। ऐसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कृषि ऋ ण कम वितरण पर बैंक अधिकारियों ने कहा कि अभी उठाव कम है। बैठक में प्रमुख सचिव अजीत केसरी, अशोक शाह, मनोज गोविल, रिजर्व बैंक, नाबार्ड सहित सभी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

बैठक में बैंकर्स ने नेगोशिएबल इंस्टूमेंट एक्ट के तहत बैंकों को दी जाने वाली छुट्टियां बढ़ाने की मांग रखी। बैंकर्स की ओर से कहा गया कि प्रदेश में बैंककर्मियों को सालभर में 18 छुट्टियां दी जाती हैं जबकि, कर्नाटक में 28, महाराष्ट्र में 25, गुजरात में 22 अवकाश मिलते हैं। इन्हें बढ़ाया जाना चाहिए। वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस पर विचार करने का भरोसा दिलाया। वहीं, काम के एक समान घंटे करने की बात भी उठी। बैंकर्स ने कहा कि काम के घंटे 10 से चार बजे तक रखे जाएं। अपर मुख्य सचिव वित्त अनुराग जैन ने कहा कि शहरी, ग्रामीण और वाणिज्यिक गतिविधियों के केंद्र में बैंकों का जो समय रखने के दिशा निर्देश का पालन होना चाहिए। मंडी क्षेत्र के बैंक 12 से छह बजे तक खुलें। बैठक में बैंकों को निर्देश दिए गए कि पेंशनर्स के डिजीटल लाइफ सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने के लिए चयनित बैंक शाखाओं में जरूरी तकनीकी व्यवस्था मुहैया कराई जाए।

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