मध्यप्रदेश का एक सरकारी स्कूल… जहां सभी छात्राओं का सरनेम ‘भारतीय’

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित शासकीय आदर्श कन्या आवासीय संस्कृत विद्यालय में पढ़ने वाली सभी छात्राओं का एक ही सरनेम होता है- ‘भारतीय’। देश की एकता, अखंडता और संस्कृति को ये बालिकाएं निराले तरीके से परिभाषित कर रही हैं। प्रदेश का यह एकमात्र ऐसा स्कूल है, जहां पढ़ने वाली हर जाति, वर्ग की छात्रा का सरनेम दाखिले के समय ही बदलकर ‘भारतीय’ कर दिया जाता है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इससे उनमें न सिर्फ समानता का भाव आता है, बल्कि यह उनके जीवन में भी उतर जाता है। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान ने वर्ष 2018 में साउथ टीटी नगर में शासकीय आदर्श कन्या आवासीय संस्कृत विद्यालय का शुभारंभ किया।
इसमें छठवीं और नौवीं कक्षा से दाखिला होता है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न् जिलों की 106 छात्राएं यहां अध्ययनरत हैं, जिनमें से 90 फीसदी एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग से हैं। टीकमगढ़, अनूपपुर, शहडोल, बालाघाट, शिवपुरी, बैतूल सहित अन्य आदिवासी बहुल जिलों की ज्यादातर छात्राएं यहां रहकर पढ़ाई कर रही हैं। इन सभी छात्राओं का सरनेम भारतीय है। संस्थान के निदेशक पीआर तिवारी बताते हैं कि बालिकाओं में समानता का भाव बना रहे, जात-पांत के दुष्चक्र से दूर रहें, देश सबसे पहले का सूत्रवाक्य जीवन में उतर सके और उनकी खुद की अलग पहचान बने, इसलिए सभी छात्राओं को भारतीय सरनेम दिया गया है।
आपस में संस्कृत में ही करती हैं बात
इस विद्यालय में छात्राओं को अन्य विषयों के साथ विशेष रूप से संस्कृत का अध्ययन कराया जाता है। वे संस्कृत के साथ वेद-पुराण, उपनिषद में पारंगत हो रही हैं। सभी छात्राएं स्वास्ति वाचन, गीता श्लोक, वेदों की ऋचाएं आदि धारा प्रवाह बोलती हैं। यही नहीं, वे आपस में संस्कृत में ही बात करती हैं।
विद्यालय की छात्राओं को संस्कृत में पारंगत बनाया जा रहा है, साथ ही आधुनिक विषयों को भी पढ़ाया जा रहा है, जिससे बेहतर भविष्य के रास्ते खुलें। विशेष बात यह कि यहां सभी का जाति- धर्म सिर्फ भारतीय ही है।
– स्नेहा सालोडकर, प्राचार्य, शासकीय आदर्श कन्या आवासीय संस्कृत विद्यालय, भोपाल, मप्र

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