इन शुभ मुहूर्त में करें दिवाली पूजा, मिलेगी समृद्धि बरसेगा धन

इस साल दिपावली का पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन स्थिर लग्न में धन की देवी महालक्ष्मी की आराधना की जाती है। दिपावली के अवसर पर शुभ मुहूर्त में देवी लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य की वृद्धि होती है और सुख-समृद्धि मिलती है।
इस साल दिवाली का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। रविवार को चित्रा नक्षत्र रात 2 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। साथ ही विष्कुम्भ योग और चन्दमा तुला राशि में 4 बजकर 32 मिनिट पर प्रवेश करेगा। दिपावली के अवसर पर अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघाडिया मुहूर्त विशेष महत्व रखते है। इसलिए शुभ मुहूर्त में दिपावली मनाना शुभ फलदायी होता है।
प्रदोष काल मुहूर्त
27 अक्टूबर 2019, रविवार को दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में 5 बजकर 40 मिनट से 8 बजकर 16 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। प्रदोष काल को दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त माना जाता है। प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न में पूजा करना सबसे उत्तम रहता है। इस दिन 6 बजकर 44 मिनट से 8 बजकर 39 मिनट तक के दौरान वृष लग्न रहेगा। प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों रहने से यह मुहुर्त शुभ रहेगा।
प्रदोष काल में मंदिर में दीपदान, रंगोली और पूजा से संबंधी अन्य तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए तथा मिठाई वितरण का कार्य भी इसी समय पर करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही द्वार पर स्वास्तिक और शुभ- लाभ लिखने का कार्य इस मुहूर्त में किया जा सकता है। इसके साथ ही इस मुहूर्त में अपने मित्रों व परिवार के बडे सदस्यों को उपहार देकर आशिर्वाद लेना मानव जीवन में शुभता की वृ्द्धि करता है।
निशिथ काल मुहूर्त
27 अक्टूबर को 8 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 52 मिनट तक निशिथ काल रहेगा। शाम 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 18 मिनट तक शुभ का चौघड़िया रहेगा। कारोबारियों के लिए इस समय पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। निशिथ काल में देवी लक्ष्मी का आवाहन, तिजोरी की पूजा और हवन श्रेष्ठ माना जाता है। इस समय महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, कलम पूजन, कुबेर पूजन और मंत्रों का अनुष्ठान शुभ माना जाता है।
महानिशीथ काल
रात 10 बजकर 52 मिनट से 1 बजकर 28 मिनट तक महानिशीथ काल रहेगा। रात 10 बजकर 51 मिनट से 1 बजकर 14 मिनट तक कर्क लग्न और सिंह लग्न होना शुभ है। इस दौरान रोग और काल की चौघडियां अनुकूल नहीं हैं, लेकिन लग्न शुभ होने से पूजा का अच्छा फल प्राप्त होता है। इस समय कोई भी कार्य प्रदोष काल अथवा निशिथकाल में प्रारंभ करके इस महानिशीथ काल में संपन्न हो रहा हो तो भी वह अनुकूल ही माना जाता है।
महानिशीथ काल में दिपावली पूजन
महानिशीथकाल में तांत्रोक्त कार्य, ज्योतिष से संबंधी कार्य, यंत्र, मंत्र से संबंधित कार्य, कर्मकाण्ड से संबंधित पूजा की जाती है।
दिपावली मुहूर्त
शुभ – शाम 5 बजकर 40 मिनट से रात 7 बजकर 18 मिनट तक
अमृत – रात 7 बजकर 10 मिनट से रात 9 बजे तक
चर – रात 9 बजे से रात 10 बजकर 30 मिनट तक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *