हरियाणा में बीजेपी के बागी हुए निर्दलीय विधायक हैं असली ‘किंगमेकर’, अब बनाएंगे खट्टर की सरकार!

नई दिल्ली/चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों भले ही बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी हो, लेकिन पार्टी के लिए ये नतीजे थोड़े निराशाजनक हैं। जहां 2014 के विधानसभा चुनाव में पार्टी बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही थी, वहीं इस बार 40 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। ऐसे में हरियाणा में बीजेपी अब निर्दलीय विधायकों के बूते सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। खास बात यह है कि निर्दलीयों में 5 बीजेपी के बागी हैं।
हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा बीजेपी नेता नड्डा से मुलाकात कर अपना संकेत दे चुके हैं, वहीं रनिया विधानसभा से जीतकर आए रंजीत सिंह ने खुले तौर पर बीजेपी को समर्थन का ऐलान कर दिया है। वहीं सूत्रों का कहना है कि अन्य निर्दलीय भी बीजेपी का ही समर्थन कर रहे हैं। इस बीच खबर है कि बीजेपी जेजेपी को भी साथ रखने की कोशिश कर रही है। बीजेपी की गुरुवार को हुई संसदीय दल की बैठक में पार्टी ने अमित शाह को सरकार बनाने के लिए सभी फैसले लेने के लिए अधिकृत कर दिया है। शाह के घर पर कल रात से ही बैठकों का दौर जारी है। इस बीच आइए जानते हैं कि बीजेपी की सरकार बनाने में मदद करने वाले ये निर्दलीय विधायक हैं कौन:
रंजीत सिंह (रनिया विधानसभा)
रनिया विधानसभा सीट से जीतकर आए रंजीत सिंह ने खुले तौर पर बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। रंजीत को यूं तो चौटाला कैंप का आदमी माना जाता है, लेकिन किसी नाराजगी के चलते चुनाव से कुछ समय पहले ही उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। लेकिन कांग्रेस से भी टिकट न मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरने का फैसला लिया और जीत दर्ज की। बीजेपी को समर्थन देने के पीछे उन्होंने पीएम मोदी की नीतियों को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि उनका समर्थन पीएम मोदी के लिए है।
गोपाल कांडा (सिरसा विधानसभा)
सिरसा से जीते हरियाणा लोकहित पार्टी (एचएलपी) के नेता गोपाल कांडा ने बीजेपी को खुला समर्थन दिया है। कांडा ने शुक्रवार को कहा कि उनका परिवार बीजेपी से जुड़ा रहा है। वह हरियाणा में खट्टर सरकार को समर्थन देंगे। कांडा ने अपने निकटतम उम्मीदवार निर्दलीय गोकुल सेतिया को 602 वोटों से हराया है। हाल में बीजेपी में शामिल हुईं जानी-मानी हरियाणवी गायिका सपना चौधरी ने कांडा के लिए प्रचार किया था। पूर्व मंत्री कांडा हरियाणा में एक प्रभावशाली राजनीतिक हस्ती हैं। उनका नाम तब सुर्खियों में आया था जब उनकी एअरलाइन कंपनी में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी।
सोमबीर (दादरी विधानसभा)
दादरी विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा है। यहां से निर्दलीय के रूप में जीत दर्ज करने वाले सोमबीर सिंह सांगवान दरअसल पहले बीजेपी के नेता रहे हैं। लेकिन चुनाव से कुछ दिन पहले ही खेल के मैदान से राजनीति के दंगल में आई बबीता फोगाट पर बीजेपी ने भरोसा जताया और अपने टिकट पर चुनाव लड़ाया। इस बात से नाराज होकर सोमबीर सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और करीब 14 हजार वोटों से जीत दर्ज की। जबकि बीजेपी की बबीता फोगाट तीसरे नंबर पर रहीं।
बलराज कुंडू (मेहम विधानसभा)
बीजेपी के एक और बागी ने बड़ी जीत दर्ज की है। मेहम विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार बलराज कुंडू भी बीजेपी के नेता थे। कुंडू यहां जिला परिषद के चेयरमैन थे। बीजेपी से टिकट की उम्मीद में उन्होंने जिला परिषद से इस्तीफा दिया। बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने निर्दलीय ही पर्चा भर दिया। यहां से उन्होंने पिछली बार के कांग्रेस विधायक आनंद सिंह ढांगी को हराया है।
धर्मपाल गोंडर (नीलोखेरी विधानसभा)
नीलोखेरी विधानसभा आरक्षित सीट है। यहां से 2014 में बीजेपी के भगवानदास ने जीत दर्ज की थी। इस बार के चुनाव में भगवानदास के साथ धर्मपाल गोंडर ने भी पार्टी से टिकट की दावेदारी पेश की। लेकिन पार्टी के सीनियर नेताओं ने पिछली बार जीतने वाले भगवानदास पर ही भरोसा जताया। इसके बाद गोंडर ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा। नीलोखेरी विधानसभा के बीजेपी के कई कार्यकर्ता पार्टी के इस फैसले से खुश नहीं थे और उन्होंने भगवानदास की जगह गोंडर का समर्थन करने का फैसला किया।
नयनपाल रावत (प्रिथला विधानसभा)
नयनपाल रावत भी प्रिथला विधानसभा में बीजेपी का जाना-पहचाना चेहरा थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इससे नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
रणधीर सिंह गोलन (पुंडरी विधानसभा)
रणधीर सिंह गोलन भी बीजेपी के नेता हैं। आरएसएस की पृष्ठभूमि का होने के साथ-साथ पार्टी में जमीनी स्तर पर उनकी अच्छी पकड़ है। वह टिकट के दावेदारों की लिस्ट में काफी ऊपर थे, लेकिन अंतर में उनका नाम काट दिया गया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और कांग्रेस के सतबीर भाना को हराया।
राकेश दौलताबाद (बादशाहपुर विधानसभा)
राकेश दौलताबाद को यूं तो आईएनएलडी का नेता माना जाता है, लेकिन पार्टी ने उनका टिकट काट दिया तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। दौलता बाद ने यहां से बीजेपी उम्मीदवार मनीष यादव को करीब 10 हजार वोटों के अंतर से हराया है।

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