मध्यप्रदेश के लोकायुक्त ने कहा- हमें नहीं चाहिए एसपी पद पर आईपीएस

भोपाल। लोकायुक्त संगठन ने अपनी विशेष पुलिस स्थापना में आईपीएस अफसरों की तैनाती से इनकार कर भारतीय पुलिस सेवा की कोशिशों को झटका दिया है। लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने दो टूक कह दिया है कि उन्हें एसपी पद पर कोई भी आईपीएस अधिकारी नहीं चाहिए। उनके लिए नॉन आईपीएस और राज्य पुलिस सेवा के वरिष्ठ वेतनमान के अनुभवी अधिकारी ही काम के साबित होंगे। लोकायुक्त जस्टिस गुप्ता ने नईदुनिया से चर्चा में कहा कि आईपीएस कैडर रिव्यू में राज्य शासन ने विशेष पुलिस स्थापना के एसपी को कैडर पदों में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। सीधी भर्ती के आईपीएस एसपी की लोकायुक्त पुलिस विशेष स्थापना में पदस्थापना होगी तो उसमें अनुभव की कमी के कारण लोकायुक्त पुलिस के काम में परेशानी आएगी। जस्टिस गुप्ता ने कहा कि इसलिए हमने लोकायुक्त पुलिस में आईपीएस की पदस्थापना को लेकर साफ इनकार कर दिया है।

लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू में हैं 17 एसपी स्तर के अफसर

लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा व सागर में एसपी कार्यालय हैं। वहीं, ईओडब्ल्यू में तीन एआईजी भी पदस्थ हैं। सूत्र बताते हैं कि आईपीएस अधिकारी लोकायुक्त पुलिस के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के कार्यालयों में आईपीएस एसपी की पदस्थापना के लिए पदों को कैडर में शामिल कराने की कोशिश कर रहे हैं। इसी तरह ईओडब्ल्यू के भी कुछ एसपी पदों को कैडर में लेना चाह रहे हैं।

सालभर से फाइलों में दौड़ रहा कैडर रिव्यू प्रस्ताव

आईपीएस का कैडर रिव्यू प्रस्ताव करीब एक साल से फाइलों में पीएचक्यू और मंत्रालय के गलियारों में यहां से वहां दौड़ रहा है। आईपीएस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व प्रशिक्षण शाखा के प्रमुख विशेष महानिदेशक संजय राणा ने प्रस्ताव तैयार किया था। सूत्र बताते हैं कि आईपीएस अधिकारी अपने मौजूदा कैडर में 65 पदों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं। इसकी फाइल कभी गृह विभाग तो कभी वित्त विभाग से लौट चुकी है। अभी मप्र के आईपीएस कैडर में 165 पद हैं, जिन्हें आईपीएस 230 कराने की कोशिश में हैं।

पदों को बढ़ाए जाने की इस कवायद में आईएएस और आईपीएस के बीच संबंधों में कड़वाहट भी आई और आईपीएस अधिकारियों ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न भी बना लिया। पिछले दिनों मंत्रालय ने पदों की संख्या कम करने के लिए फाइल भी लौटा दी थी। अब लोकायुक्त के रुख पर कैडर रिव्यू प्रस्ताव में फिर से बदलाव की संभावना है।

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