‘खिदमत’ से चलता था ठगी का नेटवर्क, शक न हो इसलिए नर्सों को एम्स घुमाने ले गए

भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में नर्स के पद पर भर्ती कराने का झांसा देकर लोगों से लभभग 2 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले आरोपितों को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। एसटीएफ ने उन्हें 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। उधर दिन भर चली सर्चिंग में पुलिस ने आरोपितों के घर से एक बोरी दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें एम्स दिल्ली का लेटर हेड के अलावा नर्सिंग की कुछ छात्राओं के मूल दस्तावेज भी शामिल हैं। पूछताछ में पता चला कि ठगी का नेटवर्क सरगना दिलशाद की डॉक्टर पत्नी के जबलपुर स्थित नर्सिंग होम ‘खिदमत’ से चलता था। एसपी (एसटीएफ,भोपाल) राजेशसिंह भदौरिया ने बताया कि गिरोह सरगना दिलशाद खान(32) और उसके साथी आलोक बामने को 5 दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। अभी तक की पूछताछ में पता चला है कि गिरोह ने अभी तक 54 छात्राओं से नौकरी लगाने के नाम से रुपए ऐंठे हैं। इनमें से 48 से दिलशाद ने रुपए लिए हैं। दिलशाद ने पांच शादियां की हैं। उसकी दो पत्नी इंदौर में,दो जबलपुर में और एक पत्नी भोपाल में एम्स अस्पताल के पास साकेत नगर में दिलशाद के साथ रहती है।

दिलशाद की जबलपुर में रहने वाली एक पत्नी फरहा डॉक्टर है। दिलशाद ने उसके लिए ठगी की रकम से आधारताल में ‘खिदमत’ नाम से एक 12 बिस्तरों का नर्सिंग होम खुलवा दिया है। दिलशाद ने पुलिस को बताया कि उसकी डॉक्टर पत्नी विभिन्न नर्सिंग कॉलेजों में संपर्क करके छात्राओं की सूची हासिल कर लेती थी। सूची में छात्राओं ने नाम के साथ मोबाइल नंबर भी होते थे। उन नंबरों पर संपर्क कर दिलशाद और आलोक एम्स में नौकरी का झांसा देकर छात्राओं को अपने जाल में फंसा लेते थे। नौकरी दिलाने के ऐवज में उन्होंने 4 से 6 लाख रुपए तक वसूल किए हैं। इनमें से कुछ छात्राओं को वे विजिट के नाम पर दिल्ली एम्स भी ले गए थे।

फरवरी से जून तक की वसूली

पुलिस पूछताछ में पता चला कि गिरोह तीन साल से इस तरह का काम कर रहा था। लेकिन इस वर्ष फरवरी-जून माह तक दिलशाद और आलोक ने धोखाधड़ी कर मोटी रकम हासिल की। इस दौरान काम नहीं होने पर जब कुछ छात्राओं ने पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी, तो कुछ लोगों को 50 प्रतिशत तक रुपए वापस भी लौटाए। उधर जून के बाद दोनों आरोपितों के अपने मोबाइल फोन के नंबर बंद करके दूसरी सिम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था।

धर्मानंद के खाते में जमा करवाते थे रुपए

एसपी भदौरिया ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि कुछ लोग साक्ष्य के लिए नकद रुपए देने के बजाए बैंक में रुपए जमा करने की शर्त रखते थे। इसके लिए शातिर आरोपितों ने अपने परिचित धर्मानंद नाम के व्यक्ति का अकाउंट नंबर दे रखा था। पुलिस धमानंद की भी तलाश कर रही है। साथ ही इस मामले में दिलशाद की पत्नी डॉ.फरहा और अयोध्या नगर निवासी आलोक की सरकारी हॉस्टल की अधीक्षक पत्नी से भी पूछताछ करेगी।

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