वन मंत्री ने ACS से छीने सारे अधिकार, शिवराज सिंह से जुड़ा है मामला

भोपाल। पौधारोपण मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपने में देरी से गुस्साए वनमंत्री उमंग सिंघार ने विभाग के प्रशासनिक प्रमुख (अपर मुख्य सचिव) एपी श्रीवास्तव के सारे अधिकार छीनकर उनके अधीनस्थ अफसर को दे दिए। मंत्री ने सचिवालय के अफसरों के बीच खुद कार्य विभाजन कर दिया। इसमें एसीएस श्रीवास्तव को सिर्फ मॉनीटरिंग का जिम्मा सौंपा है। इससे नाराज एसीएस 31 अक्टूबर तक छुट्टी पर चले गए हैं। कार्य विभाजन में एसीएस का नाम अधीनस्थों के भी नीचे लिखा गया है। मंत्री ने पौधारोपण घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार सहित वन विभाग के अफसरों के खिलाफ ईओडब्ल्यू को जांच करवाने को लिखा था। यह नोटशीट एसीएस कार्यालय में अटकी हुई थी।

प्रदेश में संभवत: पहला मामला है, जब विभाग के प्रशासनिक प्रमुख को दरकिनार कर मंत्री ने सचिवालयीन अफसरों के बीच कार्य विभाजन किया हो। मंत्री ने एसीएस के तमाम अधिकार उनके अधीनस्थ सचिव एचएस मोहंता को सौंप दिए और एसीएस श्रीवास्तव को प्रशासनिक नियंत्रण का जिम्मा सौंपा है। उन्हें ताकीद किया है कि सभी कार्यों का निपटारा समयबद्ध तरीके से नियमानुसार करें। इतना ही नहीं, एसीएस को सभी प्रकरणों में निर्णय और निपटारे से पहले विभाग के भारसाधक मंत्री सिंघार से प्रशासकीय मंजूरी लेना होगी। उन्हें विशिष्ट मदों का निपटारा करने के लिए अधिकृत किया है। हालांकि कार्यविभाजन में एसीएस के लिए कोई विशिष्ट मद नहीं छोड़ा है। कार्य विभाजन के लिए मंत्री सिंघार ने मप्र कार्यपालिक कार्य नियम-13 का हवाला दिया है। उन्होंने इसके लिए अनुपूरक अनुदेश एक और दो की आड़ ली है।

सभी जिम्मेदारियां सचिव को

कार्य विभाजन में मंत्री ने सीएम-सीएस मॉनिट से लेकर बजट, कैबिनेट प्रेसी, समन्वय, योजनाएं, विधानसभा और अदालत संबंधी जैसी तमाम महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विभाग के सचिव मोहंता को सौंप दी है। वहीं अतिरिक्त सचिव को वन नीति, नियम-निर्देश, मैन्युअल, लघु वनोपज संघ, एनवीडीए, वन विकास निगम, बांस मिशन, कैंपा, ईको पर्यटन बोर्ड, जैव विविधता बोर्ड, राज्य वन अनुसंधान संस्थान और स्थापना का जिम्मा सौंपा है। ऐसे ही पदेन सचिव को आरटीआई, जनशिकायत सहित प्रशासकीय कार्य सौंपे हैं।

हंगामे के बाद बदली नोटशीट

सचिवालय में अफसरों के बीच कार्यविभाजन को लेकर हंगामे के बीच मंत्री सिंघार ने नोटशीट बदल दी है। मामले में मंत्री सिंघार से तो बात नहीं हो पाई, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि संशोधन में विभाग के अपर मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव के पद और गरिमा का पूरा ध्यान रखा गया है।

छुट्टी पर जाने से पहले सीएस को बताते

प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरदचंद्र बेहार कहते हैं कि बिजनेस रूल्स में साफ है कि एसीएस, पीएस और सचिव विभाग के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार रहते हैं। विभाग में कार्यविभाजन का काम एसीएस का है। यदि मंत्री ने कार्य विभाजन किया है तो एसीएस श्रीवास्तव को छुट्टी पर जाने से पहले मुख्य सचिव को नोट भेजना था। उन्हें बताना था कि विभाग को लेकर कानूनी जिम्मेदारी मेरी है।

चर्चा नहीं करना चाहते

कौन क्या लिख रहा है, हम चर्चा नहीं करना चाहते। मेरा अधीनस्थ क्या लिख रहा है। मैं उसके लिए जिम्मेदार हूं। छुट्टी से लौटने के बाद देखेंगे कि नोटशीट सचिवालय नियमावली के हिसाब से ठीक है या नहीं। कार्यालय की कार्यपद्धति के हिसाब से कोई नोटशीट अर्जेंट है तो डाक स्तर पर एडजस्ट होती है। शेष को संबंधित शाखाओं को भेज दिया जाता है। रहा छुट्टी पर जाने का सवाल तो मैंने पहले से छुट्टी का आवेदन दिया था।

– एपी श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव, वन

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