हनी ट्रैप कांड: विवाद के बाद शमी को हटाया, नौ दिन में तीसरी बार बदलाव

भोपाल। हनीट्रैप मामले में जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) को नौ दिन में तीसरी बार बदला गया। विवादों के चलते एटीएस और काउंटर इंटेलीजेंस चीफ संजीव शमी को एसआईटी से हटा दिया है। अब एसआईटी की कमान लोक अभियोजन महानिदेशक राजेंद्र कुमार को सौंपी गई है।
उनके साथ एडीजी सायबर मिलिंद कानस्कर और एसएसपी इंदौर रुचिवर्धन मिश्र को टीम में शामिल किया गया है। टीम की कमान संभालने वाले राजेंद्र कुमार को यह अधिकार दिए गए हैं, वे अगर आवश्यक होगा तो अन्य अधिकारियों की मदद ले सकेंगे। डीजीपी को एसआईटी को आवश्यक सहयोग देने के आदेश दिए गए हैं।
हनीट्रैप मामले की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने 23 सितंबर को पहली एसआईटी का गठन किया था, जिसमें आईजी सीआईडी श्रीनिवास वर्मा को कमान सौंपी गई थी। इसमें कमाडेंट 25वीं बटालियन मनोज कुमार सिंह को भी रखा गया था।
एसआईटी गठन के दिन से ही मुख्यमंत्री कमलनाथ की नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी। अगले दिन 24 सितंबर को जब तक वर्मा अपनी टीम के साथ इंदौर में प्रकरण की जांच के लिए रवाना हो रहे थे तो उन्हें रोक दिया गया।
बताया जाता है कि 24 सितंबर दोपहर में चले घटनाक्रम के बाद पुलिस महानिदेशक ने सीआईडी के एडीजी राजीव टंडन, एडीजी एटीएस व काउंटर इंटेलीजेंस संजीव शमी को बुलाया और एसआईटी के चीफ में परिवर्तन करने पर चर्चा की।
शाम को ही शमी के एसआईटी प्रमुख बनाने के आदेश हो गए। मगर उनकी जांच करने की कार्यप्रणाली को लेकर नौकरशाह असंतुष्ट रहे। पुलिस अधिकारी विशेष महानिदेशक सायबर और एसटीएफ पुरुषोत्तम शर्मा आगे आए और उन्होंने केरल से ही ईमेल कर आईपीएस एसोसिएशन से सहयोग की मांग की।
वहां से लौटकर उन्होंने मीडिया के सामने एसआईटी के सुपरविजन से डीजीपी को हटाने तक की मांग कर दी। इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली से लौटने के बाद हनीट्रैप मामले की समीक्षा की और विवाद के चलते पूरे घटनाक्रम से नाराजगी भी जताई थी।

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