झाबुआ उपचुनाव तक टल सकता है पीसीसी चीफ का फैसला

भोपाल| झाबुआ उपचुनाव की तारिख के एलान के चलते एक बार फिर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और राजनीतिक नियुक्तियों का फैसला टलता नजर आ रहा है| कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक ये नियुक्ति अब झाबुआ उपचुनाव के बाद ही मुमकिन है। इस समय पार्टी का फोकस झाबुआ की जीत पर है। विधानसभा के भीतर संख्याबल बढ़ाने को लेकर यह चुनाव बेहद अहम् माना जा रहा है| कांग्रेस को अगर सफलता मिलती है तो झाबुआ की एक सीट कांग्रेस को बहुमत की ओर ले जाएगी तो भाजपा के पाले से एक सीट कम होगी। सीट बचाने भाजपा भी तैयारियों में जुट गई है|

सूत्रों के मुताबिक अब तक हुए मंथन के बाद आम सहमति नहीं बन पाई है| जिसके चलते पीसीसी अध्यक्ष को लेकर चल रही कवायद अब नए सिरे से शुरू होगी। नए पीसीसी अध्यक्ष के लिए अब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कमलनाथ सरकार के मंत्रियों बाला बच्चन, उमंग सिंघार, ओमकार सिंह मरकाम जैसे आदिवासी नेताओं व ओबीसी से आने वाले मंत्री जीतू पटवारी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नाम चर्चा में आए थे। वहीं मीनाक्षी नटराजन का नाम भी अब चर्चा में है| लोकसभा चुनाव के बाद से ही पीसीसी चीफ को लेकर मंथन चल रहा है, लेकिन अब तक फैसला नहीं हो पाया| वहीं लम्बे समय से राजनीतिक नियुक्तियों के लिए जोर लगा रहे नेताओं का भी इन्तजार बढ़ गया है| पीसीसी चीफ पर फैसला होने के बाद ही निगम मंडलों में नियुक्तियों का रास्ता साफ़ होगा| इन नियुक्तियों पर कई बड़े नेता दावेदारी कर रहे हैं और भोपाल से लेकर दिल्ली तक जोर लगा चुके हैं| फिलहाल पार्टी का फोकस उपचुनाव जीतने पर है|

भाजपा 25 के बाद करेगी टिकट का ऐलान

भाजपा झाबुआ उपचुनाव के लिए 25 सितंबर के बाद ही प्रत्याशी के नाम का ऐलान करेगी। प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह फिलहाल विदेश में हैं। वे 26 की सुबह भोपाल पहुंच रहे हैं। उनके आने के बाद ही प्रदेश चुनाव समिति बैठक में उम्मीदवार का नाम फाइनल कर सकती है। नामांकन की अंतिम तिथी 30 सितंबर है। भाजपा ने शिवराज सरकार में मंत्री रहे रंजना बघेल, अर्चना चिटनीस, अंतर सिंह आर्य और पारस जैन की ड्यूटी झाबुआ उपचुनाव में लगाई है। इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा, कृष्ण मुरारी मोघे, रमेश मैंदोला भी वहीं डेरा डालेंगे।

भाजपा कांग्रेस में सीधी जंग

जयस के उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले के बाद अब भाजपा और कांग्रेस में सीधी जंग होगी| भाजपा विधायक जीएस डामोर के सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई है। भाजपा एक बार फिर से यह सीट जीतना चाहेगी। भाजपा इस चुनाव में कांग्रेस सरकार के खिलाफ उपजी नाराजगी, बारिश में बर्बाद हुई फसलों और केन्द्र सरकार के 370 जैसे निर्णयों के दम पर चुनाव जीतने की तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस कर्जमाफी और आदिवासियों को लेकर की गई घोषणाओं को भुनाने के प्रयास में है| कांग्रेस झाबुआ जीतकर भाजपा के उन सभी सवालों का जवाब देना चाहती है जो उसने आठ महीने के दौरान खड़े किए हैं। उम्मीदवार को लेकर पार्टी के अंदरखाने जरूर घमासान मचा हुआ है, लोकसभा चुनाव में झाबुआ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को मिली बढ़त के आधार पर पूर्व केंद्रीय मंत्री भूरिया प्रबल दावेदारी जता रहे हैं। मगर लोकसभा चुनाव में जेवियर मेड़ा उपचुनाव की स्थिति बनने पर कांग्रेस के प्रत्याशी बनाए जाने के आश्वासन पर पार्टी में वापस आए थे। इससे वे भी टिकट पाने के प्रति आश्वस्त हैं। उधर, भूरिया के पुत्र डॉ. भूरिया भी पिता को टिकट नहीं मिलने पर अपनी दावेदारी को ठोस बता रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक शीर्ष स्तर पर नाम तय कर लिया गया है, जल्द ही उम्मीदवार की घोषणा कर दी जायेगी|

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