पुलिस ने मांगा रिमांड तो कोर्ट बोली- कोई आधार नहीं, आरोपितों को 4 अक्टूबर तक जेल

इंदौर। नगर निगम के इंजीनियर को हनीट्रैप में फंसाकर तीन करोड़ रुपए की मांग करने के मामले में पुलिस के हत्थे चढ़ी तीनों आरोपित महिलाओं को शुक्रवार को पुलिस ने जिला अदालत में पेश किया। आरोपितों से पूछताछ के लिए दो दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन अदालत ने इससे इनकार करते हुए तीनों को चार अक्टूबर तक जेल भेज दिया। अदालत ने माना कि पुलिस रिमांड के लिए कोई आधार नहीं है। मामले में एक आरोपित महिला की तरफ से जमानत आवेदन भी आ गया। इस पर सोमवार को सुनवाई होगी।

आरोपितों के वकीलों ने दी ये दलील

आरोपितों के वकीलों ने कहा, पक्षकार का लेना-देना नहीं है। पुलिस मोबाइल व लैपटॉप पहले ही जब्त कर चुकी है। मुख्य आरोपित 22 सितंबर तक रिमांड पर है। तीनों आरोपितों को तीन दिन पहले हिरासत में लिया था पर पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं दिखाई। कोर्ट गुरुवार को एक दिन के रिमांड पर सौंप चुकी है। ऐसी स्थिति में फिर रिमांड पर सौंपने का मतलब नहीं।

देर शाम : कोर्ट का पुलिस रिमांड पर सौंपने से इनकार

अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया जो देर शाम जारी हुआ। न्यायाधीश पाटीदार ने तीनों आरोपितों को पुलिस रिमांड पर सौंपने से इनकार करते हुए उन्हें 4 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

अभियोजन का तर्क: वीडियो, रकम की पूछताछ जरूरी प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार पाटीदार के समक्ष अभियोजन ने तर्क रखा कि मामले में कुछ वीडियो मिले हैं। आरोपितों से पूछताछ होना बाकी है कि ये वीडियो कब और कहां बनाए गए हैं? इसके अलावा एक बड़ी रकम भी जब्त हुई है। यह पूछताछ भी होनी है कि यह रकम कहां से आई थी?

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