इंदौर में प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने का अवैध कारखाना पकड़ा

इंदौर। खाद्य व औषधि प्रशासन ने द्वारकापुरी क्षेत्र के ममता नगर में किराए के मकान में चल रहा ऑक्सीटोसिन का अवैध कारखाना पकड़ा है। यहां से ऑक्सीटोसिन के एक लाख रुपए कीमत के चार हजार इंजेक्शन जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस इंजेक्शन के निर्माण व बिक्री पर प्रतिबंध लगा हुआ है। जिस आरोपित को गिरफ्तार किया, वह जामनगर गुजरात का रहने वाला है। वह किराना दुकानों को इंजेक्शन सप्लाई करता था।
ये दुकान संचालक दूध विक्रेताओं को इंजेक्शन बेचते थे। दूध विक्रेताओं को लगता था कि इस इंजेक्शन के लगाने से मवेशी ज्यादा दूध देती हैं। ड्रग इंस्पेक्टर धर्मेश बिलोनिया ने बताया कि द्वारकापुरी टीआई ने फोन पर जानकारी दी कि पुलिस ने जामनगर गुजरात के रहने वाले भीमटी भाई नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो नकली दवाइयों का निर्माण कर रहा था।
इसके बाद खाद्य व औषधि विभाग की टीम ने मौके पर जाकर देखा तो वहां एसेडिक एसिड, फिनोल, पानी और ऑक्सीटोसिन को मिलाकर 100, 150 और 200 एमएल के ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन तैयार किए जा रहे थे। टीम ने मौके पर मिली सभी सामग्रियों जब्त कर ली। आरोपित ने कबूला कि वह चार महीने से मकान किराए पर लेकर इंजेक्शन व बोतल निर्माण कर लेबल लगाए बिना किराना दुकानों पर सप्लाई करता था, जिससे किसी को पता न चले किये किस दवाई के इंजेक्शन व बोतल हैं।
नौकरी देने के नाम पर करवा रहा था काम
ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि आरोपित कुछ लोगों को नौकरी देने के नाम पर काम करवा रहा था। उन लोगों को भी नहीं पता था कि यह काम अवैध रूप से चल रहा है। पुलिस उन किराना दुकानों की भी पूछताछ कर रही है, जहां आरोपित इंजेक्शन सप्लाई करता था। दवाई बनाने का लाइसेंस नहीं होने के चलते पुलिस ने नकली दवाई बनाने का मामला दर्ज किया है।
शरीर के लिए हानिकारक
पशुरोग विशेषज्ञ प्रशांत तिवारी के अनुसार, आक्सीटोसिन मानव शरीर के लिए घातक है। इससे मवेशी दूध ज्यादा नहीं देते, बल्कि जल्दी देते हैं। इसलिए पशुपालकों में भ्रम बना रहता है कि दूध ज्यादा आता है।

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