न पत्रकारिता की न उसकी पढाई, फिर भी बना दिए गए कुलपति

भोपाल ( ब्यूरो)। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में बयान दर्ज कराने के लिए बुधवार को तीसरी बार पहुंचे। उनसे करीब छह घंटे की पूछताछ हुई, जिसमें 55 सवाल पूछ गए। उन्होंने लगभग हर सवाल का टालमटोल जवाब दिया। अब उन्हें चौथे दौर की पूछताछ के लिए 23 सितंबर को बुलाया गया है।

वहीं, ईओडब्ल्यू ने अब उनकी नियुक्ति को विवादास्पद मानते हुए उससे जुड़े दस्तावेजों को तलब किया है। कुलपति के लिए वांछित योग्यता में 20 साल की पत्रकारिता अनिवार्य थी, लेकिन कुठियाला ने पत्रकारिता की न पत्रकारिता की पढ़ाई ही की। इसके बाद भी महापरिषद ने उन्हें कुलपति के लिए चयनित कर दिया।

माखनलाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. कुठियाला बयान दर्ज कराने के लिए बुधवार दोपहर करीब एक बजे ईओडब्ल्यू मुख्यालय पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक कुठियाला से देर शाम तक पूछताछ की गई, जिसमें स्टडी सेंटर खोलने, वेबसाइट बनवाने, लैपटॉप व मोबाइल तथा फिश एक्वेरियम घर ले जाने, ऑफिस में शराब कैबिनेट बनवाने और दौरे के दौरान शराब के बिल का पुनर्भुगतान प्राप्त करने जैसे विषयों पर सवाल किए गए। इनमें से कुछ सवालों को लेकर कुठियाला ने अधीनस्थ कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया कि उन्होंने नियमों के मुताबिक बताकर भ्रमित किया और कुछ सवालों पर वे नियमों को देखकर बताने का बहाना बनाकर टाल गए।

अब नियुक्ति की जांच

सूत्रों ने बताया कि ईओडब्ल्यू ने कुठियाला की डिग्री और उनके पिछले कार्यस्थलों की जांच पड़ताल करते-करते उनके कुलपति बनने की योग्यता को विवादास्पद मानते हुए विवि से नियुक्ति के दस्तावेजों का परीक्षण करने को कहा है। साथ ही दस्तावेजों को मांगा है, जिससे उनकी नियुक्ति की वैधानिक की पड़ताल की जा सके। बताया जाता है कि कुठियाला मानव शाा और समाज शाा में स्नाकोत्तर हैं, लेकिन उन्होंने पत्रकारिता के छात्रों को इंस्टीट्यूट ऑफ मॉस कम्युनिकेशन एंड मीडिया टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र तथा गुरु जंबलेश्वर यूनिवर्सिटी हरियाणा में पढ़ाया था।

जबकि उन्होंने न तो पत्रकारिता की कोई डिग्री ली है और न ही कभी पत्रकारिता की है। ईओडब्ल्यू ने माखनलाल विवि के कुलपति के लिए वांछनीय योग्यता के नियमों को भी खंगालना शुरू कर दिया है। इसके नियम 10(3) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि विवि का कुलपति वही व्यक्ति हो सकता है, जिसके पास प्राइवेट या सार्वजनिक उपक्रम में कम से कम 20 साल की पत्रकारिता का अनुभव हो। ईओडब्ल्यू ने विवि के कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया के दस्तावेजों को भी मंगाया है।

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