मध्यप्रदेश कांग्रेस का विवाद दिल्ली पहुंचा, सोनिया निकालेंगी समाधान

भोपाल। मप्र कांग्रेस का ताजा विवाद दिल्ली दरबार पहुंच गया है। कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा सार्वजनिक तौर पर चल रही बयानबाजी से पार्टी की हो रही छिछालेदार पर नाराजगी प्रकट करने के बाद इसके स्थायी हल की आस जगी है।

गुरुवार को विवाद के पक्ष दिग्विजय सिंह द्वारा सोनिया गांधी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने के बाद मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को पूरी रिपोर्ट के साथ दिल्ली बुलाया हैं। नाथ की सोनिया से मुलाकात में अनुशासन तो मुख्य मुद्दा रहेगा ही, साथ-साथ लंबे समय से टल रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति के समाधान निकलने के भी संकेत मिल रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले पांच दिन से प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। राज्य सरकार के मंत्री उमंग सिंघार द्वारा पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर लगाए गए सनसनीखेज आरोपों से न सिर्फ पार्टी का अनुशासन छलनी हुआ, बल्कि भाजपा को भी हमलावर होने का अवसर मिल गया।

इस विवाद की आड़ में अन्य विधायकों एवं नेताओं द्वारा एक दूसरे पर किए गए वार प्रतिवार ने पार्टी की छवि को भी गहरे तक नुकसान पहुंचाया। तीन दिन बाद जब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उमंग सिंघार को बातचीत के लिए बुलाया और उन्हें सार्वजनिक बयानबाजी न करने की हिदायत दी उसके बाद वे चुप हो गए, लेकिन इसके बाद दिग्विजय सिंह समर्थक मैदान में आ गए।

सिंह ने पांच दिन की चुप्पी के बाद छठे दिन शुक्रवार को भोपाल पहुंचने के बाद मुंह खोला और बताया कि जब से उन्होंने भाजपा और बजरंग दल पर आईएसएस को लेकर बयान दिया उसी के बाद उनके खिलाफ घटनाक्रम शुरू हुआ। सिंह ने गुरुवार को दिल्ली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर ताजा विवाद से उन्हें अवगत कराया। इसके बाद वे रात को भोपाल लौटे।

रात में ही उनकी मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात हुई। इसके बाद नाथ ने दिल्ली जाने का कार्यक्रम बनाया। दिन में भी कमलनाथ की दिग्विजय सिंह से एकांत में बातचीत हुई।

सूत्रों के मुताबिक सोनिया संग मुलाकात में ताजा विवाद मुख्य मुद्दा रहेगा। इस बारे में प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया भी अपनी रिपोर्ट रख चुके हैं। दूसरा अहम मुद्दा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति का भी है। इस पद के लिए पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों ने जर्बदस्त दबाव बनाया हुआ है।

सूत्र बताते हैं कि उनका नाम दो तीन बार लगभग फाइनल भी हो चुका है, लेकिन दो-दो पावर सेंटर न बनाने की आड़ लेकर नियुक्ति रोक दी गई। इस बार भी उनका नाम दमदारी के साथ उभरा है। नाथ-सिंह की जोड़ी बाला बच्चन जैसे किसी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर देखना चाहती है।

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