IFS ने की बदसलूकी, अपनी ही सरकार में मंत्री की नहीं हुई सुनवाई

भोपाल। विधि और विधायी मंत्री पीसी शर्मा की अपनी ही सरकार में सुनवाई नहीं हो रही है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर एसके सिंह के खिलाफ शर्मा ने करीब दो माह पहले वनमंत्री उमंग सिंघार से शिकायत की थी। मंत्री शर्मा ने बाकायदा नोटशीट भेजी। इसमें कहा कि आईएफएस अफसर ने फोन पर उनसे अभद्र भाषा में बात की है। मंत्री शर्मा ने यह बात मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी बताई, लेकिन अब तक संबंधित अफसर से सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा गया है। अफसर पर कार्रवाई न होने से मंत्री शर्मा दुखी हैं और फिर से मुख्यमंत्री के पास जाने की बात कर रहे हैं। मंत्री शर्मा होशंगाबाद के प्रभारी हैं। इस नाते उन्होंने 5 फरवरी 2019 को वनपाल सुरेंद्र कुमार पटेल के तबादले की अनुशंसा की थी। यह तबादला सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर एसके सिंह को करना था। जब पटेल मंत्री की अनुशंसा के साथ ऑफिस पहुंचे, तो डायरेक्टर ने उनके इस कृत्य पर नाराजगी जताते हुए उन्हें सिविल सेवा नियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। यह बात मंत्री शर्मा तक पहुंची, तो मंत्री ने डायरेक्टर सिंह से फोन पर बात की।
मंत्री का आरोप है कि इस दौरान डायरेक्टर सिंह ने उनसे बदसलूकी की है। डायरेक्टर से नाराज मंत्री शर्मा ने जून 2019 में मामले की शिकायत वनमंत्री उमंग सिंघार से की। शर्मा ने बाकायदा नोटशीट लिखकर अपनी नाराजगी का इजहार किया। उनका कहना है कि प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के बावजूद कर्मचारी का तबादला तो नहीं किया, उल्टे उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसे गलत मानते हुए मंत्री ने संबंधित अफसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की, लेकिन अब तक अफसर के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से वे दुखी हैं। मामले में वन विभाग ने डायरेक्टर सिंह से स्पष्टीकरण मांगा था, जो वह विभाग को सौंप चुके हैं। इसमें सिंह ने मंत्री शर्मा के आरोपों को गलत ठहराया है।
मंत्री की अनुशंसा लेकर आए थे वनपाल 
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर एसके सिंह कहते हैं कि मंत्री शर्मा ने जिस वनपाल पटेल के तबादले की अनुशंसा की, वह दिसंबर 2018 से ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे। मंत्री की अनुशंसा के बाद वे अचानक 27 फरवरी 2019 को उपस्थित हो गए। फिर भी फिटनेस सर्टिफिकेट पेश नहीं किया। इस कारण उन्हें अनुपस्थित माना गया और आचार संहिता एवं उपस्थिति प्रमाणित नहीं करने पर तबादला नहीं हो सका।
मैंने कुछ गलत नहीं बोला
उस समय लोकसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी थी। इसलिए तबादला नहीं कर पाए। फोन पर मंत्री से मैंने अभद्र भाषा में बात नहीं की। उस चर्चा का ऑडियो हो तो जांच करा लें। मैंने तो अपना पक्ष रखा है। वनपाल को नोटिस देना सामान्य प्रक्रिया है।

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