महाकाल मंदिर : पुजारियों ने अशुभ बताकर कराया था खाली, अब फिर से वहीं लगेगा दफ्तर

उज्जैन। पुजारियों के कहने पर अफसरों ने जिस मंदिर कार्यालय को खाली कर दिया था, अब वहां फिर से दफ्तर लगेगा। शुक्रवार को प्रशासक सुजानसिंह रावत ने भवन के कार्यालय में भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना कर इसकी शुरुआत की। बताया जाता मंदिर प्रशासन के अन्य विभागों को भी यहां पूर्व की तरह शिफ्ट किया जाएगा। बता दें वर्तमान में इस भवन में चिकित्सालय संचालित हो रहा है।
मंदिर प्रबंध समिति द्वारा सिंहस्थ 2016 में करीब 2 करोड़ रुपए खर्च कर नया प्रशासनिक भवन बनाया गया था। सिंहस्थ के बाद करीब दो साल तक यहां मंदिर प्रशासन का दफ्तर रहा। इसके बाद लगातार प्रशासक के रूप में आए अफसरों के तबादले होने लगे। कोई भी प्रशासक चार माह से अधिक नहीं टिक पाया।
वर्तमान प्रशासक सुजानसिंह रावत की पहली पारी भी इसमें शामिल है। अफसरों के एक के बाद एक होते तबादले के कारण मंदिर के कुछ पुजारियों ने भवन को अशुभ बताया और इसे खाली करने की सलाह दी।
इसके बाद भवन को खाली कर पुराने प्रशासनिक भवन में कार्यालय स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन दूसरी बार प्रशासक बनने के बाद रावत ने फिर से नए भवन में कार्यालय शिफ्ट करने की ठानी है। शुक्रवार को उन्होंने भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित प्रशासक कार्यालय में भगवान महाकाल की पूजा अर्चना की। एक दो दिन में पुराने भवन से कार्यालय नए भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
लिफ्ट लगी
अंधविश्वास के चलते नए भवन को खाली करना महाकाल भक्तों को रास नहीं आ रहा था। बता दें केंद्र सरकार की सिबडा योजना के तहत प्राधिकरण इस भवन में लिफ्ट लगवा रहा है।
उज्जैन विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री केसी पाटीदार ने बताया कि लिफ्ट लगाने के लिए स्थान उस समय तय किया गया था, जब यहां कार्यालय लगता था। योजना के तहत अगर लिफ्ट का स्थान बदला तो राशि लैप्स हो जाएगी। सूत्र बताते हैं इसके बाद कलेक्टर ने नए भवन में कार्यालय स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।

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