जनता की आवाज बोल रहे हैं केपी सिंह – नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव

भोपाल / इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में लगातार नए नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। कांग्रेस को सत्ता में आए आठ महीने हो चुके हैं लेकिन पार्टी के विधायक सरकार की रणनीति और कामकाज से खफा हैं। कांग्रेस के विरष्ठ विधायक केपी सिंह ने एक सभा को संबोधित करते हुए अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनके बयान के बाद राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इंदौर प्रवास पर मीडिया से इस बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि केपी सिंह जी बहुत वरिष्ठ विधायक हैं। पहले कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। मैं मान के चलता हूं वह 30 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं। उ्न्होंंने सिंधिया जी के खिलाफ जनसंघर्ष भी किया है वह एक पके हुए नेता हैं कांग्रेस के। केपी सिंह जी जो कह रहे हैं उसका अर्थ समझ लेना चाहिए जनता के लिए।
वह जनता की आवाज बोल रहे हैं। वह एक पके हुए और मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह बात कर रहे हैं। सरकार अपने वचन पर खरे नहीं उतरी, भ्रष्टाचार भी प्रदेश व्याप्त है यह भी केपी सिंह जी ने कहा। प्रदेश में फिरौती ली जा रही है, अपहरण हो रहे हैं कानून व्यवस्था पूरी तरह से हाथों से बाहर है। प्रदेश में सिर्फ दो ही उद्योग चल रहे हैं एक तो तबादला उद्योग और दूसरा अपहरण का उद्योग चल रहा है। सरकार ने अभी तक 9 महीने में कुछ नहीं किया है। केपी सिंह जी की जो आवाज है वह वरिष्ठ कांग्रेसी की दर्द भरी आवाज है उसे कांग्रेस को सुनना चाहिए। उनसे जब पूछा गया कि क्या वह बीजेपी में आ सकते हैं? इस सवाल के जवाब में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि कोई अगर इस तरह की बात अपनी पर्टी को कहता है तो मैं इस बात को यह नहीं समझता कि वह बीजेपी में आने की बात कर रहे हैं। वह अपनी सरकार को चेता रहे हैं अलग अलग फोरम से उनकी तरह कई और भी नेता समय समय पर अपनी पार्टी को चेता रहते हैं।
मुझे यह कहते हुए दुख है कि सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री जिस तरह मौज मस्ती की राजनीति कर रहे हैं मैं मान के चल रहा हूं यह अप्लकालीन है उनकी सरकार और एक बीमार संतान कबतक दीर्घजीवी होगी। सपा, बसपा और निर्दलीय मिलकर सरकार बनाए हुए हैं जिस दिन इनकी सरकार का मंत्री मडल विस्तार होगा। तब सब साफ हो जाएगा।
गौरतलब है कि बुधवार को केपी सिंह ने कमलनाथ सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा, विधानसभा में किसी तरह से सरकार बन गई, तो इस मानसिकता के भय से बहुत बड़ा दबाव प्रशासनिक विभागों में नहीं बन पाया। वही पुरानी व्यवस्था, लूट खसोट, भ्रष्टाचार, अनाचार का वातावरण बना हुआ है। कुछ कमी आई है, लेकिन उतना असर नहीं हुआ है। केपी सिंह ने कहा- जो बदलाव सरकार बनने के बाद आना चाहिए था वह नहीं आया है। इसलिए प्रशासनिक सुधार नहीं हो पा रहा है। मेरे मन में भी संतुष्टि नहीं है। धीरे-धीरे बदलाव की कोशिश की जा रही है।

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