कमलनाथ सरकार के इस दांव से बीजेपी में खलबली

भोपाल। नवंबर-दिसंबर में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव अब अगले साल 2020 में होंगे। कमलनाथ सरकार ने इसे अगले साल करवाने का फैसला लिया है।खबर है कि शहरों की सीमा विस्तार व वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया ही आगामी 30 जनवरी तक चलेगी। महापौर व अध्यक्ष पद के लिये आरक्षण की तारीख 20 फरवरी 2020 निर्धारित कर दी गई है और इसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होंगे। ऐसे में कई नगर निगम व नगर पालिका जहां मौजूद परिषद का कार्यकाल पूरा होने वाला है वहां अगले कुछ माह के लिये प्रशासक बैठाये जा सकते हैं। सरकार के इस फैसले के बाद सियासत गर्मा गई है।चुनाव में देरी के कारण बीजेपी हमलावर हो चली है और एक के बाद गंभीर आरोप लगा रही है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि, प्रदेश में कांग्रेस लोकतंत्र और नगरीय निकायों की स्वतंत्रता का हनन कर रही है, और कांग्रेस नगरीय निकायों के चुनाव से डर रही है। सरकार चुनावों को टालकर प्रशासक बैठाना चाहती है। कांग्रेस मनमानी ढंग से परिसीमन करना चाहती है। प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की है कि, जैसे अभी तक नगरीय निकाय का चुनाव हुआ है, वैसे ही चुनाव कराए जाने चहिए। बता दे कि प्रदेश भर में 16 नगर निगम, 98 पालिका और 294 नगर परिषद हैं। इनमें से 297 का कार्यकाल 15 जनवरी 2020 तक समाप्त हो जाएगा। चुनाव टलने की स्थिति में निकायों की कमान प्रशासक को सौंपी जा सकती है। सूत्रों की माने तो नवंबर-दिसंबर में निकाय और जनवरी-फरवरी में पंचायत चुनाव प्रस्तावित थे, लेकिन सरकार नहीं चाहती है कि लोकसभा चुनाव के इतने कम वक्त के बाद फिर चुनाव में जाना पड़े।कांग्रेस इस बहाने अपने आप को मजबूत करने में जुटी है। इसके मद्देनजर सरकार ने चुनाव को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने कलेक्टरों को निकायों की सीमावृद्धि और वार्डों की संख्या को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।ऐसे में इस साल चुनाव होना संभव है जो अब सीधे मई जून में होगें।

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