वित्तमंत्री ही देंगे राजस्व छूट-वाहन खरीदी की अनुमति

भोपाल। वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियों के मामलों में अब वित्त मंत्री के अधिकार अफसरों से ज्यादा रहेंगे। चाहे 50 लाख रुपए से ज्यादा की राजस्व छूट देनी हो, वाहन किराए पर लेने का मामला हो या फिर पांच करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज या अग्रिम लेना हो, वित्तमंत्री की अनुमति लेनी ही होगी।

इतना ही नहीं, पदों को बनाने या समाप्त करने, नए कार्यालय खोलने या पदों को निरंतर रखने के लिए भी वित्त मंत्री के पास ही फाइल आएगी। दस साल बाद हुए इस फैसले से अधिकारी अपने स्तर पर कोई अंतिम फैसला नहीं कर पाएंगे।

सूत्रों के मुताबिक शिवराज सरकार में वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार अफसरों के पास अधिक थे। नीतिगत मामलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश प्रकरणों में अपर मुख्य सचिव, प्रमुख और सचिव के स्तर से प्रस्तावों को अनुमोदन दे दिया जाता था। इससे प्रशासनिक और वित्तीय कामों में दिक्कतें आ रही थीं।

दरअसल, सवाल-जवाब मंत्री से होते हैं और उन्हें शिकवा-शिकायत होने या फिर कोई नीतिगत मामला सामने आने पर ही चीजें पता लगती थीं। इसके साथ ही प्रदेश के खजाने की स्थिति को देखते हुए कड़ा अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है। इसके मद्देनजर सरकार ने अधिकारियों की जगह वित्त मंत्री को अधिकार संपन्न् बनाया है। नए वाहन अब तभी खरीदे जा सकेंगे, जब वित्त मंत्री प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगा देंगे। 50 लाख रुपए से अधिक के अनुदान के मामले हों या फिर पांच करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज या अग्रिम का प्रकरण हो, प्रस्ताव अधिकारियों के माध्यम से मंत्री तक पहुंचेगा। राजस्व में माफी या छूट देने के सभी मामलों में फैसला मंत्री ही लेंगे। नए कर लगाने और दरों में बदलाव, नए कार्यालयों में दस लाख रुपए से ज्यादा का खर्च, बजट में कोई नया खर्च शामिल करने, विदेश यात्रा, वेतनमान, भत्ता, पेंशन, कर्मचारियों को नई सुविधा देने से जुड़े सभी मामलों का निराकरण मंत्री के अनुमोदन से ही होगा।

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