जब कमलनाथ से गौर ने कहा, राघव अच्छे अफसर हैं, आप साथ रखिए

भोपाल। बात सन् 2008 की है। विधानसभा चुनाव का कुछ समय बचा था। मंत्रालय में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात राघवचंद्रा केंद्र की यूपीए सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाना चाह रहे थे। चंद्रा पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के भी करीबी अफसरों में शुमार हुआ करते थे, सो दोपहर के वक्त वे गौर साहब के 74 बंगले स्थित आवास पहुंचे। मैं भी उस वक्त गौर के साथ बैठा बतिया रहा था।पीएस चंद्रा के आते ही गौर ने कहा बैठो, बस अभी मैं कमलनाथ जी से बात करता हूं। उन्होंने तत्काल टेलीफोन उठाया और ऑपरेटर से कहा कमलनाथ जी से बात कराओ। ऑपरेटर थोड़ी देर बाद कॉल करके बताता है कि अभी उनसे बात नहीं हो पा रही है। कुछ देर वे चंद्रा से बात करते हैं और वे वहां से निकल जाते हैं। चंद्रा के निकलने के कुछ ही समय बाद कमलनाथ जी के बंगले से फोन आ जाता है।
गौर साहब तत्काल एक आदमी को दौड़ाते हैं और राघव चंद्रा को वापस बुलवाते हैं। चंद्रा आकर गौर साहब के सामने बैठ जाते हैं। जैसे ही कमलनाथ लाइन पर आते हैं तो गौर साहब दुआ सलाम करने के बाद उनसे कहते हैं कि हमारे मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस हैं राघव चंद्रा। बहुत अच्छे अफसर हैं। आउटस्टैंडिंग काम है। मैं इनको आपके पास भेज रहा हूं। आप अपने साथ रखिएगा। बस उसके बाद लंबे समय तक कमलनाथ के साथ भूतल परिवहन मंत्रालय में राघव चंद्रा संयुक्त सचिव रहे।अफसर भी देते थे उनकी ईमानदारी की मिसाल
बताते हैं कि बाबूलाल गौर ने कभी अपना ईमान नहीं बेचा। तब भी नहीं, जब उनकी पत्नी की हालत बेहद नाजुक थी। एक अधिकारी उन्हें लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पास गए और बताया कि गौर साहब की पत्नी की हालत सीरियस है। सो सिंह ने तत्काल कहा कि बताओ कितनी और क्या मदद चाहिए। गौर साहब ने कहा कि मुझे सिर्फ इतनी मदद कर दो कि मुंबई में मेरी पत्नी का इलाज हो जाए। दिग्विजय सिंह ने तब मुंबई के सबसे बड़े अस्पताल के मालिक को फोन लगाया और कहा कि ये बाबूलाल गौर मेरे दोस्त हैं। मेरी भाभीजी की तबीयत खराब है और मैं इन्हें आपके पास भेज रहा हूं। उनके सारे इलाज का खर्च आप मेरे हिसाब में लिख लेना।
क्या करूंगा गुटबाजी करके
बात उस समय की है, जब गौर को हटाकर शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाया गया था। मैंने उनसे पूछा कि आप प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और अब मंत्री बन रहे हैं, ऐसा क्यों। उनका जवाब बेहद सरल था। उन्होंने कहा कि मैं यदि खाली घर में बैठा रहा तो पटवा-जोशी गुट की तरह एक और गुट बन जाएगा पर मंत्री बना रहा तो मैं अपनी उस जनता के काम आसानी से करता रहूंगा, जिन्होंने मुझे चुना है।
बहुत बढ़िया प्रशासक थे गौर
बाबूलाल गौर को प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ प्रशासक कहा जा सकता है। याद करें आप 2003 में जब भाजपा सरकार सत्ता में आई थी, तब प्रदेश की माली हालत कर्मचारियों को वेतन देने लायक भी नहीं थी। गौर सीएम बने तो उन्होंने सबसे पहले आर्थिक हालात सुधारे। मप्र कैडर के आईएएस अफसर रहे विजय सिंह को अपना मुख्य सचिव बनाकर सुशासन की दिशा में बेहतरीन काम किया। एक बार का घटनाक्रम याद है जब राजस्व मंडल में भेजे गए विनोद चौधरी और रंजना चौधरी अपना तबादल रुकवाने का आग्रह करने गौर के पास पहुंचे। गौर ने उन्हें दो टूक कहा कि पहले तो ज्वाइन करो, फिर मेरे पास आना, तभी बात करूंगा। सख्त प्रशासक के रूप में उनके ऐसे अनगिनत तमाम किस्से हैं, जो याद आ रहे हैं।

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