भ्रष्ट अफसरों पर जल्द कसेगा शिकंजा, जांच में आएगी तेजी

भोपाल। प्रदेश में भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों के खिलाफ सालों से चल रही जांच में अब तेजी आएगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भ्रष्ट अफसरों से जुड़ी जानकारी तलब की है। जिस पर जल्द ही फैसला ले सकते हैं। जिन अफसरों के खिलाफ जांच चल रही है, उनमें ज्यादातर वे हैं, जिनके खिलाफ शिवराज सरकार में भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच बैठाई गई, लेकिन जांच ठप पड़ी है। जिसकी वजह से किसी भी अफसर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। अब कमलनाथ सरकार भ्रष्ट नौकरशाहों पर शिकंजा कसने जा रही है।
भ्रष्ट अफसरों से जुड़ी सवाल हर बार विधानसभा में उठता है, लेकिन सरकार कार्रवाई कुछ नहीं करती है। पिछले महीने राज्य सरकार ने एक बार फिर विधानसभा में बताया कि 48 आईएएस अफसरों के खिलाफ विभिन्न मामलों में 85 जांच चल रही हैं। जिनमें कलेक्टर से लेकर अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट में छिंदवाड़ा कलेक्टर श्रीनिवास शर्मा, कई विभागों के प्रमुख सचिव एवं रिटायर्ड अफसर शामिल हैं।
अफसरों के खिलाफ लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू व विभागीय जांच चल रही है। दोनों ही जांच एजेंसियों में अफसरों के खिलाफ जांच लंबे समय से लंबित है। सबसे ज्यादा 27 मामले आईएएस अधिकारी रमेश थेटे के विरुद्ध हैं। कुछ अधिकारियों के खिलाफ दो से ज्यादा जांच भी जारी हैं। इनमें कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरुद्ध भी जांच चल रही है।
इन अफसरों के खिलाफ जारी है जांच
जिन अफसरों के खिलाफ जांच चल रही है उनमें आरडी अहिरवार, आरके गुप्ता, सीबी सिंह, ओआर तिवारी, रमेश थेटे, अखिलेश श्रीवास्तव, प्रकाश जांगरे, एनबीएस राजपूत, वेदप्रकाश, एमके सिंह, प्रमोद अग्रवाल, डॉ एम गीता, विवेक पोरवाल, निसार अहमद, मुक्तेश वाष्र्णेय, अरुण तोमर, डॉ. जे विजय कुमार, अजीत केसरी, पीएल सोलंकी, मनीष श्रीवास्तव, मनीष सिंह, पीएस सोलंकी, मनोज श्रीवास्तव, अशोक शाह, प्रवीण अढायच, गोपाल चंद्र डाढ, एमसी चौधरी, रजनीश श्रीवास्तव, मनोज पुष्प, मनु श्रीवास्तव, अविनाश लवानिया, मुकेश शुक्ल, एनएस परमार, अरुणा शर्मा, आरपी मंडल, एम कुजूर, डीपी तिवारी, सत्यप्रकाश वर्मा, अशोक वर्मा, एमए खान, महेंद्र सिंह भिलाला, अंजु सिंह बघेल, लक्ष्मीकांत द्विवेदी, स्वतंत्र कुमार सिंह, श्रीनवास शर्मा, विनोद कुमार शर्मा शामिल हैं। इनमें से आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
निठल्लों पर मेहरबान है विभाग प्रमुख
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पिछले महीने फरमान जारी किया कि अधिकारी एवं कर्मचारियों के काम की समीक्षा के आधार पर उनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार की जाए, लेकिन डेढ़ महीने बाद किसी भी विभाग ने अभी तक निठल्ले अधिकारी, कर्मचारियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पास नहीं भेजी है। जबकि हर विभाग में निठल्ले कर्मचारियों की अच्छी खासी संख्या है। मंत्रालयीन सूत्रों ने बताया कि जो अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन्हें घर बैठानी की तैयारी है। अखिल भारतीय सेवा के अफसरों को लेकर केंद्र सरकार से पत्राचार किया जाएगा। क्योंकि केंद्र सरकार ने भी भ्रष्ट एवं लापरवाह नौकरशाहों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की शुरूआत कर दी है। अब मप्र सरकार भी इस दिशा में कार्रवाई करने जा रही है। यहां बता दें कि राज्य सरकार के अधिकारी एवं कर्मचारियों की परफॉर्मंेस रिपोर्ट अगले एक महीने के भीतर तैयार होकर मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच जाएगी। इसके बाद लापरवाहों पर गाज गिरेगी।

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