अनुच्छेद 370: मीडिया पर रोक के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- थोड़ इंतजार करेंगे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आज उन याचिकाओं पर सुनवाई जारी है जिनमें जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र सरकार के फैसले और उसके बाद राज्य में मीडिया और अन्य संचार माध्यमों पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दी गई है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एसए नजीर की विशेष पीठ ने “कश्मीर टाइम्स” की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की।

इस दौरान कोर्ट ने मीडिया पर लगे प्रतिबंधों को लेकर कहा कि वो कोई भी आदेश पारित करने से पहले कुछ समय तक राज्य की स्थिति को देखेगी। कोर्ट ने यह बात केंद्र की उस दलील के बाद कही है जिसमें केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्य में स्थिति सामान्य है और प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए जा रहे हैं।

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि, ‘हमने आज अखबार में पढ़ा है कि राज्य में टेलीफोन और ब्रॉडबैंड सेवाएं धीरे-धीरे शुरू की जा रही हैं। हमे आज जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का कॉल भी आया था। हम थोड़ा वक्त देना चाहते हैं और फिर कोई फैसला लेंगे।’

10 अगस्त को दायर याचिका में पत्रकार अनुराधा भसीन ने पूरे राज्य में मोबाइल, इंटरनेट एवं लैंडलाइन सेवाओं समेत संचार के सभी माध्यमों को बहाल करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की है ताकि मीडिया अपना काम कर सके।

अधिवक्ता एमएल शर्मा को लगाई फटकार

वहीं कोर्ट ने अधिवक्ता एमएल शर्मा गलत याचिका दायर करने पर फटकार भी लगाई। चीफ जस्टिस ने याचिका को देखते हुए कहा कि इसका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने पूछा कि यह किस तरह की याचिका है? इस तत्काल खारिज कर दिया जाना चाहिए लेकिन इसके साथ 5 और रजिस्ट्री शामिल हैं। बता दें एमएल शर्मा ने छह अगस्त को दायर अपनी याचिका में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने को चुनौती दी है। उन्होंने दावा किया है कि अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति का आदेश गैरकानूनी है क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सहमति के बिना जारी किया गया।

इन दोनों के अलावा जम्मू-कश्मीर की मुख्य राजनीतिक पार्टी नेशनल कांफ्रेंस ने भी याचिका दायर कर अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने को चुनौती दी है। पार्टी ने तर्क दिया है कि इन बदलावों ने जनादेश के बिना वहां के नागरिकों से उनके अधिकार छीन लिए हैं। यह याचिका नेशनल कांफ्रेंस के लोकसभा सदस्यों मुहम्मद अकबर लोन और जस्टिस (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी ने दायर की है। लोन जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हैं जबकि जस्टिस मसूदी जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के वही पूर्व न्यायाधीश हैं जिन्होंने 2015 में एक फैसले में अनुच्छेद 370 को संविधान का स्थायी प्रावधान करार दिया था।

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