27 साल पहले मप्र विधानसभा पारित कर चुकी है 370 पर अशासकीय संकल्प

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा ने आज से 27 साल पहले जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 हटाए जाने का अशासकीय संकल्प ध्वनिमत से पारित किया था। तब राज्य में सुंदरलाल पटवा की सरकार काबिज थी और कांग्रेस विपक्ष में थी। कांग्रेस के एकमात्र सदस्य सुरेश सेठ ने इस बिल को पेश किया था। शेष पार्टी ने विधानसभा का बहिष्कार किया था। जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 हटाए जाने संबंधी बिल राज्यसभा और लोकसभा से बहुमत से पारित होते ही मप्र विधानसभा में ध्वनिमत से पारित अशासकीय संकल्प की याद आना लाजिमी है।
1990 में भाजपा भारी बहुमत से सरकार में आई थी। सुंदरलाल पटवा मुख्यमंत्री बनाए गए थे, जबकि श्यामाचरण शुक्ल नेता विपक्ष थे। अब न पटवाजी इस दुनिया में हैं, न सुरेश सेठ और न ही श्यामाचरण शुक्ल, लेकिन सदन में तब मौजूद अनेक नेता और अधिकारियों की स्मृति पटल पर वह घटना अंकित है। विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवान देव इसरानी बताते हैं कि यह प्राइवेट मेंबर बिल कांग्रेस के सुरेश सेठ ने ही रखा था। सुरेश सेठ को कांग्रेस का शेर कहा जाता था। उनकी गिनती उन नेताओं में होती थी, जिनके लिए जनहित पार्टी हित से ऊपर था।
वे अर्जुन सिंह सरकार में मंत्री थे। सिंह से उनकी पूरे समय खटपट चलती रही। जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने का अशासकीय संकल्प जब उन्होंने विधानसभा में दिया, तब कांग्रेस के आला नेताओं ने इसे वापस लेने के लिए उन्हें काफी समझाया पर वे नहीं माने। बाद में समूचे विपक्ष ने विधानसभा का बहिष्कार किया। अकेले सेठ ने भाजपा के साथ मिलकर उस अशासकीय संकल्प को ध्वनिमत से पारित करवाया।
तब विधानसभा में शुक्ल के अलावा अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा, कृष्णपाल सिंह, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल जैसे दिग्गज नेता, विपक्ष की पहली पंक्ति के सदस्य थे, तो सत्ता पक्ष में पटवाजी के अलावा शीतला सहाय, रामहित गुप्ता, लक्ष्मीनारायण शर्मा, बाबूलाल गौर, विक्रम वर्मा, डॉ. गौरीशंकर शेजवार जैसे वरिष्ठ लोग मंत्री थे, जबकि शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय, नरोत्तम मिश्रा, अनूप मिश्रा जैसे नेता पहली बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे थे।
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव भी उस ऐतिहासिक घटनाक्रम के साक्षी हैं। वे तब सत्ता पक्ष के विधायक थे। 1992 में अनुच्छेद 370 हटाने का अशासकीय संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया था। तब देश में वीपी सिंह की सरकार थी।

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