इंदौर के 32 करोड़ के ठेके में तत्कालीन मंत्री व अफसरों पर प्रारंभिक जांच दर्ज

भोपाल। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के करीबी मुकेश शर्मा से पूछताछ के बाद मंगलवार को प्रारंभिक जांच दर्ज कर ली है। इसमें मुकेश शर्मा के खिलाफ नामजद तो नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन मंत्री, विभाग प्रमुख और इंदौर नगर निगम के अफसरों की जांच शुरू की गई है। यह कार्रवाई इंदौर में दस साल पहले सीवेज लाइन बिछाने के ठेके में पांच कंपनियों को बिना काम 32 करोड़ रुपए दिए जाने की जांच के बाद की गई है। जांच के लिए ईओडब्ल्यू ने ग्वालियर टीम भी भेजी है।
नागार्जुन और सिम्प्लेक्स को दिया था ठेका
बताया जाता है कि इंदौर में नगर निगम के सीवेज लाइन बिछाने के लिए 2008 में नागार्जुन कंस्ट्रक्शन और सिम्प्लेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को ठेका दिया गया था। इन कंपनियों ने काम तो किया, लेकिन उन्होंने 32 करोड़ रुपए से ज्यादा इंदौर की पांच कंपनियों सुमित इंटरप्राइजेज, आरआर इंटरप्राइजेज, अशोक इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और आरपी ट्रेडर्स को स्थानांतरित कर दिए।
पांच कंपनियों ने 32.03 करोड़ रुपए 17 किसानों को दिए

  • नागार्जुन कंस्ट्रक्शन ने 19.35 करोड़ तथा सिम्प्लेक्स ने 12. 68 करोड़ पांच कंपनियों को दिए। इन्होंने यह राशि ग्वालियर के 17 किसानों को दी थी।
  • उक्त राशि स्थानांतरित करने के लिए किसानों के डबरा के सहकारी बैंक में जून 2008 के बीच खाते खोले गए।
  • किसानों ने भोपाल में होशंगाबाद रोड के रतनपुर में पांच एकड़ तथा चूना भट्टी में 0.70 एकड़ जमीन खरीदी। भुगतान किसानों के खातों से हुआ।
  • कुछ किसानों के खाते खुलने के पहले ही 12 जून को बैंक से डीडी बन गए थे, जिससे बैंक ट्रांजेक्शन पर भी संदेह है।
    ठेके के बाद अस्तित्व में आईं
    सूत्रों के मुताबिक, मुकेश शर्मा से पूछताछ में सामने आया कि नागार्जुन व सिम्प्लेक्स को ठेके मिलने की अवधि में ही इंदौर की पांच कंपनियां अस्तित्व में आईं। संचालकों को लेकर ईओडब्ल्यू जांच कर रही है।
    नामों का जिक्र नहीं
    रिपोर्ट में तत्कालीन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, विभाग प्रमुख एसएन मिश्रा, कमिश्नर निगम नीरज मंडलोई व कार्यपालन यंत्री वी. जादौन के नाम दर्ज हैं। मंत्री व अधिकारियों के नाम नहीं है।

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