नरेंद्र मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने का प्रस्ताव संसद में पेश कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम मोदी के साथ कैबिनेट की बैठक के बाद राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल पेश करते हुए चार संकल्प पेश किए। इसी के तहत शाह ने अनुच्छेद 370 के खंड (क) को छोड़कर पूरे अनुच्छेद को खत्म करने का प्रस्ताव किया है। हालांकि, इस अनुच्छेद को खत्म करने की राह में अभी बाधाएं हैं। माना जा रहा है कि विपक्षी दल सरकार के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। अब सवाल उठता है कि केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव के बाद अनुच्छेद 370 को कैसे खत्म किया जाएगा। बता दें कि आर्टिकल 370 के खंड (क) के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 238 के उपबंध जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में लागू नहीं होते हैं।
-केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पेश करते हुए राज्य पर चार संकल्प पेश किया।
-सरकार ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का प्रस्ताव पेश किया।
-चूंकि सरकार ने इस प्रस्ताव को राज्यसभा में बिल के रूप मे पेश किया है, इसलिए इसपर बहस होगी।
-संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति अनुच्छेद 370 को खत्म करने की अधिसूचना तभी निकाल सकते हैं जब राज्य की संविधान सभा ऐसा करेगी। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अभी राज्यपाल शासन लागू है, ऐसे में यह नियम यहां लागू नहीं होता है।
-माना जा रहा है कि विपक्षी दल केंद्र सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
-आर्टिकल 370 को पूरी तरह से हटाने की वास्तविक प्रक्रिया कुछ और है। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया होती है।
-कहा जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी निजी तौर पर देश के कई मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे और उन्हें अनुच्छेद 370 को खत्म करने पर समर्थन मांग सकते हैं।
शाह ने बताया कैसे हटेगा आर्टिकल 370
गृह मंत्री शाह ने कहा कि राष्ट्रपति को अनुच्छेद 370 के उपबंध (3) के तहत अनुच्छेद 370 को खत्म करने का अधिकार है। शाह ने कहा, ‘अच्छा रहता कि सारे सदस्य यह जान लेते कि हम किस पद्धति से, किस धारा के तहत हमने यह किया है। उन्होंने सदन में धारा 370 के खंड 3 का उल्लेख किया और कहा कि देश के राष्ट्रपति महोदय को धारा 370(3) के अंतर्गत पब्लिक नोटिफिकेशन से धारा 370 को सीज करने का अधिकार है। आज सुबह राष्ट्रपति महोदय ने एक नोटिफिकेशन निकाला है, कॉन्स्टिट्यूशन ऑर्डर निकाला है, जिसके अंदर उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा का मतलब जम्मू और कश्मीर की विधानसभा है। चूंकि संविधान सभा तो अब है ही हीं, वह समाप्त हो चुकी है। इसलिए, संविधान सभा के अधिकार जम्मू-कश्मीर विधानसभा में निहित होते हैं। चूंकि वहां राज्यपाल शासन है, इसलिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सारे अधिकार संसद के दोनों सदन के अंदर निहित है। राष्ट्रपति के इस आदेश को साधारण बहुमत से पारित कर सकते हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इसके पहले कांग्रेस पार्टी 1952 में और 1962 में धारा 370 में इसी तरीके से संशोधन कर चुकी है। उसी रास्त पर यह हुआ है।

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