MP के चार लाख पेंशनर्स की महंगाई राहत का मामला CG में अटका, डेढ़ माह में नहीं आ पाई सहमति

भोपाल। प्रदेश के चार लाख से ज्यादा पेंशनर्स की महंगाई राहत (डीआर) बढ़ाने का मामला छत्तीसगढ़ की सहमति नहीं मिलने से अटक गया है। डेढ़ माह पहले इसके लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन वहां अभी तक महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला ही नहीं हुआ है। जबकि कमलनाथ सरकार जून में ही कर्मचारियों और पेंशनर्स का डीए/डीआर नौ से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का निर्णय ले चुकी है। उधर, छत्तीसगढ़ की सहमति लेने की अनिवार्यता को खत्म करने पर कैबिनेट में सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद भी वित्त विभाग में फाइल तक नहीं बनी है।कमलनाथ सरकार ने राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंश्ानर्स को केंद्र के समान महंगाई भत्ता व महंगाई राहत देने के लिए जून में तीन फीसदी डीए/डीआर बढ़ाया था। जनवरी 2019 से इसे लागू किया गया। जनवरी से अप्रैल तक के डीए की राशि भविष्य निधि खाते में जमा कराकर मई के वेतन से नकद भुगतान शुरू कर दिया।

इसमें पेंशनर्स को पूरा भुगतान नकद किया जाना था। सरकार के निर्णय को क्रियान्वित करने के लिए वित्त विभाग ने भी बिना समय गंवाए छत्तीसगढ़ सरकार से डीआर बढ़ा जाने को लेकर सहमति मांग ली, जो आज तक नहीं मिली। इसके कारण प्रदेश के चार लाख से ज्यादा पेंशनर्स को बढ़ाए गए डीआर का फायदा नहीं मिल रहा है। इसके लिए बार-बार स्मरण पत्र भी भेजे जा रहे हैं। सहमति नहीं मिलने से होने वाली परेशानी का मुद्दा कैबिनेट में भी उठा था। राज्य बंटवारा अधिनियम के इस प्रावधान को खत्म करने आम सहमति भी बन गई थी, लेकिन वित्त विभाग ने अभी तक इस मामले की फाइल ही तैयार नहीं की। जबकि इस प्रावधान को खत्म करने दोनों राज्यों के बीच सहमति होना जरूरी है। पेंशनर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गणेशदत्त जोशी का कहना है कि पेंशनर्स के लिए डीआर में होने वाली वृद्धि काफी अहम होती है। जब कैबिनेट में इस पर आम राय बन चुकी है तो फिर वित्त विभाग को आगे बढ़कर निर्णय करा लेना चाहिए। वैसे भी दोनों प्रदेशों में एक ही दल की सरकार है, इसलिए मुख्यमंत्री कमलनाथ स्वयं इस मामले में पहल करें तो निर्णय जल्द हो जाएगा। उधर, पेंशनर्स में समस्याओं का समाधान नहीं होने को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। विकासखंड और जिलों में मांग पत्र सौंपने के बाद अब भोपाल में मानसून के विदा होते ही प्रदेशस्तरीय आंदोलन की तैयारी हो रही है।

वित्तमंत्री ने कहा था, दोनों को एक साथ दें लाभ

सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्री तरुण भनोत इस बात के पक्ष मे थे कि अधिकारियों और कर्मचारियों को भी बढ़ा हुआ डीए तभी दिया जाए जब पेंशनर्स के डीआर में वृद्धि हो जाए। दरअसल, पेंशनर्स ने वित्त मंत्री से मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याएं बताई थीं।

इसके मद्देनजर वे भी सहमत थे कि इस मामले में विलंब नहीं होना चाहिए। सभी के साथ एक समान व्यवहार होना चाहिए। हालांकि, छत्तीसगढ़ से सहमति मिलने में आम तौर पर होने वाली देरी का हवाला देते हुए विभागीय अधिकारियों ने उन्हें डीए में वृद्धि का आदेश जारी करने के लिए तैयार कर लिया था।

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