जानिए क्या जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केद्र शासित पद्रेश बनाने से क्या पड़ेगा फर्क

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा सोमवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने का प्रस्ताव पेस कर दिया गया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग करते हुए दोनों ही को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की बात कही गई है। दोनों में फर्क इतना रहेगा का लद्दाख जहां बिना विधायिका का केंद्र शासित प्रदेश होगा वहीं जम्मू-कश्मीर में विधायिका होगी।

जानिए क्या है दोनों में अतंर

दोनों ही राज्य भले ही केंद्र शासित प्रदेश होंगे लेकिन इनमें काफी कुछ अंतर भी होगा। जहां तक लद्दाख की बात की जाए तो यह बिना विधायिका का केंद्र शासित प्रदेश होगा इसका मतलब इस राज्य में सीधे केंद्र सरकार का साशन होगा। एक केंद्र शासित प्रदेश का शासन उस राज्य में केंद्र द्वारा नियुक्त प्रशासक या उपराज्यपाल के द्वारा किया जाता है। यह उपराज्यपाल राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जाते हैं।

फिलहाल देश में केवल दिल्ली और पुडुचेरी को आंशिक राज्य का दर्जा दिया गया है। दिल्ली व पुदुचेरी दोनो की अपनी चयनित विधानसभा, मंत्रिमंडल व कार्यपालिका है, लेकिन उनकी शक्तियां सीमित हैं। उनके कुछ कानून भारत के राष्ट्रपति के “विचार और स्वीकृति” मिलने पर ही लागू हो सकते हैं। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी अब दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधायिका होगी।

यह होगा बदलाव

केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद देश में एक राज्य कम होकर 28 राज्य हो जाएंगे और पहले के 7 केंद्र शासित प्रदेशों की बजाय 9 केंद्र शासित प्रदेश हो जाएंगे।

क्या कारण है केंद्र शासित प्रदेश बनाने का ?

देश में कोई भी केंद्र शासित प्रदेश बनाने के पीछे कई कारण हैं अगर संक्षिप्त में इन पर नजर डालें तो

– कम जनसंख्या और छोटा आकार महत्वपूर्ण कारण है। मसलन दिल्ली को छोड़कर बाकी सभी केंद्र शासित प्रदेशों में आबादी बहुत कम है |

– अलग संस्कृति होना भी एक एक कारण है। जैसे कि भारत के कुछ राज्यों में विदेशी शासकों का शासन रहा और इस वजह से वहां की संस्कृति पर उसका असर है। इनमें बड़े उदाहरण, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव (पुर्तगाली) और पुदुचेरी (फ्रेंच) हैं।

– सामरिक महत्त्व भी केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने का मुख्य कारण हो सकता है। जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान से खराब रिश्ते और आतंकी घटनाओं को देखते हुए भी इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने का फैसला लिया गया है।

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