घर से एक साथ उठीं पांच अर्थियां, कलेजे के टुकड़ों को जाता देख मां बोली-जाने की उम्र तो हमारी थी

भोपाल। आनंद नगर स्थित प्रेस कालोनी में हीरालाल महोदिया के घर से सोमवार सुबह जब दो जवान बेटों, बहू और दोनों पोतियों की अर्थियां एक साथ उठीं तो सबकी आंखें नम हो गईं। जिसने भी उन्हें देखा, मुंह से एक ही बात निकली, ऐसा दुखों का पहाड़ किसी पर न टूटे। वहीं कलेजे के टुकड़ों को अंतिम यात्रा पर जाता देख मां कह रही थी कि जाने की उम्र तो हमारी थी। वहीं पांचों शवों का अंतिम संस्कार हथाईखेड़ा रोड स्थित आनंद नगर श्मशान घाट में किया गया। बता दें कि रविवार को आष्टा के पास महोदिया परिवार की कार पुलिया से टकरा गई थी। इसमें परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई थी।
आनंद नगर श्मशान घाट में सोमवार को हीरालाल ने अपने छोटे भाई दिनेश के बेटे मानव के साथ तीन को मुखाग्नि दिलवाई। वहीं उनकी दोनों पोतियों को दफनाया गया। इससे पहले अर्थियां ले जाते समय रास्ते में पिता हीरालाल की तबीयत कई बार बिगड़ी। अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए और उन्होंने मृतकों श्रद्घांजलि दी। पूर्व महापौर कृष्णा गौर समेत अन्य स्थानीय नेता महोदया परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे। हीरालाल बोले कि बेटों के लिए इलेक्ट्रिक का ठेका लेना शुरू किया था। मेरी तो पेंशन आती है, उसी से गुजारा होता था।
बता दें कि भोपाल के आनंदनगर प्रेस कॉलोनी निवासी 30 वर्षीय अंकुश महोदिया, 28 वर्षीय पत्नी श्रद्धा, 8 वर्षीय बेटी हिया, 4 वर्षीय अंशिका, छोटा भाई 28 वर्षीय अनुराग महोदिया इंदौर से भोपाल लौट रहे थे। कार को अंकुश का दोस्त राहुल चला रहा था। पगारिया घाटी के पास एक कार को ओवरटेक करते समय उनकी कार अनियंत्रित होकर पुलिया से टकराकर पलट गई। सभी घायलों को तत्काल सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टर ने अंकुश, श्रद्धा, अनुराग, हिया और अंशिका को मृत घोषित कर दिया। जबकि राहुल को प्राथमिक उपचार के बाद सीहोर जिला अस्पताल रेफर किया गया। जहां इलाज के दौरान राहुल ने भी दम तोड़ दिया।
जयपुर रवाना किया शव
राजस्थान निवासी राहुल भोपाल पेपर देने आया था। उसकी मौत के बाद उसकी छोटी बहन को फोन कर सूचना दी गई थी। परिजन उसका शव लेकर राजस्थान के जयपुर के लिए रवाना हो चुके हैं।
बेटों को याद कर रो रही मां
सड़क हादसे में अपना पूरा परिवार खो चुकी मां सुनीता बिस्तर पर पड़ी हैं। वह बार-बार कह रही थी कि मेरे बेटे चले गए। पड़ोसी महिलाओं से वह अपनी छोटी पोती हिया के कहे आखिरी शब्द बता रही थी कि शनिवार को पोती ने कहा था कि दादी आप मेरे साथ स्कूल चलना। मिस ने होमवर्क दिया है, मेरा होमवर्क पूरा नहीं हो पाता है, आप उनसे बात करना। हिया का इसी वर्ष स्कूल में दाखिला हुआ था। छोटे बेटे अनुराग की याद में मां कह रही थी कि वह अपने हाथ से सब्जी, रोटी और पुलाव खिलाकर गया था। उस दिन खाना बनाने वाली नहीं आई थी।

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