एडीजी अपराध अनुसंधान श्री राजीव टंडन को पितृशोक

भोपाल/ अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान श्री राजीव टंडन के पिताश्री श्री रतन लाल टंडन का गत 22 जुलाई को देहावसान हो गया। यहां भोपाल में भदभदा घाट स्थित विश्रामगृह पर गत सोमवार को उनकी पार्थिव देह का अंतिम संस्‍कार किया गया। सन्‍ 1928 में जन्‍मे श्री रतन लाल टंडन जीवन पर्यन्‍त समाज सेवा में जुटे रहे।
सिवनी मालवा इटारसी में प्राथमिक शिक्षा गृहण करने के बाद उन्‍होंने राष्‍टपिता महात्‍मा गांधी की कर्मस्‍थली वर्धा से स्‍नातक की पढ़ाई की। वर्धा में रहने के दौरान उन पर राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के व्‍यक्तित्‍व का गहरा प्रभाव पड़ा और वे बापू के सिद्धांतों पर चलकर जीवन भर समाज सेवा खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्‍चों को शिक्षित करने में जुटे रहे। स्‍व.टंडन ने वर्ष 1956 तक नागपुर विश्‍वविद्यालय में प्राध्‍यापक के रूप में अध्‍यापन किया। मध्‍यप्रदेश के पुनर्गठन के बाद वे खंडवा, जबलपुर व भोपाल जिले में योजना एवं सांख्‍यकी विभाग में पदस्‍थ रहे। सेवा निवृत्ति के बाद उन्‍होंने जबलपुर में भारत सेवक समाज संस्‍था से जुड़कर झुग्‍गी-झौंपडि़यों एवं मलिन बस्तियों के गरीब परिवारों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। इस संस्‍था में उनके द्वारा पढ़ाये गए बच्‍चे अच्‍छे पदों पर कार्यरत हैं।
स्‍व. रतन लाल टंडन ने वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय सिविल डिफेंस के डिप्‍टी कंट्रोलर के दायित्‍व का निर्वहन भी किया। देश की राजधानी नई दिल्‍ली में प्‍लानिंग कमीशन में भी उन्‍होंने कुछ समय तक अपनी सेवाएं दी। उनके सुपुत्र श्री राजीव टंडन उन्‍हें याद करते हुए कहते हैं कि समाज सेवा के प्रति उनके सर्मपण का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंतिम सांस लेने के एक दिन पहले तक वे जबलपुर में संचालित स्‍कूल में अध्‍यनरत गरीब बच्‍चों का हाल-चाल जानते रहे और उनकी पढ़ाई के संबंध में स्‍कूल प्रबंधन को निर्देश भी देते रहे। चुनाव प्रबंधन में उन्‍हें महारत हासिल थी। यही वजह रही कि वे चुनाव के दौरान हर कलेक्‍टर के विशेष चहेते रहे।

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