मध्‍यप्रदेश में तीन साल से लंबित है व्यापमं की 32 परीक्षाओं की जांच

भोपाल। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले से संबंधित कई जांच अब भी ठंडे बस्ते में हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर सीबीआई सिर्फ उन्हीं 212 मामलों की जांच कर रही है, जिनमें एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज कर ली थी। शेष मामलों की जांच से सीबीआई ने इनकार कर दिया था।

जो शिकायतें एसटीएफ या सीबीआई को मिली थीं, उनके बारे में सीबीआई ने तीन साल पहले मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इनकी जांच करने में असमर्थता जताते हुए कहा था कि इनकी जांच आप अपने स्तर पर करवा लें पर मुख्य सचिव कार्यालय ने तीन साल में कोई फैसला नहीं किया।

इसमें सबसे अहम शिकायत व्यापमं की 32 अन्य भर्ती या चयन परीक्षाओं से संबंधित थीं, जो घोटाले की अवधि में ही ली गई थीं, लेकिन उन्हें जांच के दायरे में नहीं लिया गया था। इसके अलावा एक अन्य शिकायत के मुताबिक, व्यापमं द्वारा पीएमटी 2008 से लेकर 2013 के 3133 परीक्षार्थियों के रोल नंबर परिवर्तित कर गड़बड़ी की गई थी। जांच समिति की सिफारिश के बावजूद इनमें से मात्र 1073 छात्रों के परिणाम निरस्त किए गए। शेष 2060 घोटालेबाजों को बचा लिया गया था।

सीबीआई ने 320 पेज की इन शिकायतों की मूल प्रति भी मुख्य सचिव को भेज दी थी पर मुख्य सचिव कार्यालय और अन्य विभाग जांच करवाने के बजाए अलग-अलग बहाने बनाकर समय व्यतीत करते रहे। पहले विधि विभाग से सलाह मांगी, अब सरकार ने सीबीआई द्वारा सुझाए जांच के बिंदुओं की जानकारी व्यापमं (अब प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड) से मांगी है।

विधि विभाग ने कहा-सीबीआई का पत्र तथ्यात्मक जांच से संबंधित

मुख्य सचिव को मिले पत्र पर विधि विभाग ने कहा कि सीबीआई के पत्र में बताए गए बिंदु तथ्यात्मक जांच से संबंधित हैं और इसमें किसी प्रकार की कानूनी बाधा नहीं है। इसका फैसला प्रशासकीय विभाग करे।

सीबीआई ने जांच योग्य मुद्दे भी सुझाए

सीबीआई के पुलिस अधीक्षक पंकज कामबोज ने 12 अगस्त 2016 को मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा था कि पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने ऐसे कई मुद्दे उठाए हैं, जो व्यापमं घोटाले से संबंधित हैं। यह शिकायत आपकी ओर भेजी जा रही है, जिस पर जांच का निर्णय आप अपने स्तर पर लें। इसमें व्यापमं और एसटीएफ अफसरों द्वारा जांच में ढिलाई बरतने का आरोप भी शामिल था।

सीएम के निर्देश के बाद भी गड़बड़ी क्यों जारी रही

सीबीआई ने शिकायत के जांच योग्य कई मुद्दे भी सुझाए, जिनमें कहा कि 2009 में विधानसभा में पीएमटी में गड़बड़ी की जांच के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए थे, फिर क्यों बाद के वर्षों में भी गड़बड़ी जारी रही। इसके लिए गठित जांच समिति ने गड़बड़ी रोकने के गंभीर प्रयास क्यों नहीं किए।

32 परीक्षाओं को जांच के दायरे में क्यों नहीं लिया

व्यापमं में जब गड़बड़ियां हुईं, उस दौरान 32 परीक्षाएं और भी आयोजित की गई थीं, लेकिन उन्हें जांच के दायरे में नहीं लिया गया। इनमें भी समान प्रकृति से फर्जीवाड़ा हुआ था।

मेरी शिकायत को सरकार दबा क्यों रही: सकलेचा

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने नईदुनिया से कहा कि मेरी शिकायत की जांच कराने से सरकार क्यों कतरा रही है। एसटीएफ ने व्यापमं की 32 परीक्षाओं को जांच में ही क्यों नहीं लिया। सीबीआई ने कहा कि फिर भी मुख्य सचिव कार्यालय बताने को तैयार नहीं कि शिकायत पर क्या कार्रवाई की। परिवर्तित रोल नंबर वाले 2060 आरोपितों को बचा लिया गया, इसके क्या कारण हैं। 2006 से पीएमटी में गड़बड़ी पाई गई पर कोई बड़ा अधिकारी अब तक दोषी नहीं पाया गया और न ही जांच के दायरे में लिया गया।

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