टेबल पर मक्खी दिखने पर पांच हजार की पेनल्टी!

रतलाम। रेलवे रनिंग रूम में गार्ड और लोको पायलट के ठहरने पर इन्हें भोजन सहित अन्य इंतजाम रेलवे द्वारा ठेके पर करवाए जाते हैं। कोलकाता की जीएसआईएस फर्म के स्थानीय प्रतिनिधि द्वारा सब्सिडाइज्ड मिल योजना में काम के बदले एक साल की अवधि का 1.19 करोड़ से अधिक राशि का बिल भुगतान के लिए दिया गया। छानबीन के बाद पहली बार में बिल स्वीकृत किया गया, लेकिन रेल अधिकारियों ने बिल देरी से लगाने सहित अन्य बिंदुओं को अनियमितता मानते हुए 2.23 करोड़ की पेनल्टी लगा दी। रेलवे में अपने तरह का यह पहला मामला है जब मूल राशि से ज्यादा पेनल्टी लगाई गई हो।

मामला वर्ष 2010-13 और 2015- 16 के बीच का है। इन तीन साल में अधिकारियों के तबादले भी हो गए। पेनल्टी में टेबल पर मक्खी दिखने पर पांच हजार तो तय संख्या में कर्मचारी नहीं मिलने पर एक कर्मचारी के वेतन से चार गुना की राशि शामिल है। भुगतान राशि पाने के लिए फर्म के प्रतिनिधि डीआरएम ऑफिस से लेकर पश्चिम रेलवे मुख्यालय मुंबई तक चक्कर लगा रहे हैं लेकिन निराकरण नहीं हो पाया।

अब पुराने बिल को भी माना गलत वेतन से चार गुना राशि

खास बात यह है कि पूर्व में जिस बिल को सही मानते हुए भुगतान कर दिया गया था उसे भी गलत मानते हुए अगले भुगतान की प्रक्रिया में पिछली पेनल्टी जोड़ दी। मामले में सूचना के अधिकार में जानकारी मांगी गई तो 26 महीने तक जानकारी नहीं दी गई। बताया जाता है कि इस पूरे मामले में अधिकारियों ने भी नियमों की अनदेखी की। तत्कालीन समय में पदस्थ एई टीआरओ एसके निगम ने कहा कि यह उनके कार्यकाल के बाद का मामला है।

वर्ष 2015-16 में सब्सिडाइज्ड मिल योजना में ठेकेदार पर बिल से ज्यादा पेनल्टी मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसे लेकर सीधे तौर पर मुझसे कोई भी मिला नहीं है। पिछले कार्यकाल की जानकारी मैं नहीं दे सकता। -आरएन सुनकर, डीआरएम, रतलाम

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