सत्र के बाद विभागों के बनेंगे समूह, CM ने मांगी रिपोर्ट

भोपाल। प्रदेश में प्रशासनिक कसावट के लिए समान प्रकृति का काम करने वाले विभागों का समूह बनाने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई। एक बैठक होने के बाद जब कोई प्रगति नहीं हुई तो मुख्यमंत्री सचिवालय के नाराजगी जताने पर फिर विभाग प्रमुखों की बैठक बुलाने की तैयारी है।

मुख्य सचिव कार्यालय भी इसकी निगरानी कर रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ विभागों ने लिखित अभिमत भी सामान्य प्रशासन विभाग को नहीं भेजे हैं। बताया जा रहा है कि विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद इस काम को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण संस्थान ने मंत्रालय में विभागीय कामकाज का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। शिवराज सरकार में यह रिपोर्ट फाइल में ही कैद होकर रह गई थी। कमलनाथ सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग को इस पर काम करने के निर्देश दिए।

बीती दस जून को सभी विभाग प्रमुखों की बैठक बुलाकर समान प्रकृति का काम करने वाले विभागों का समूह बनाकर कृषि उत्पादन आयुक्त जैसी व्यवस्था लागू करने पर सुझाव मांगे गए। बैठक में कुछ अधिकारियों ने विरोध किया तो बाकी ने समन्वय समिति बनाने की बात रखी। एक राय नहीं बनने की वजह से सभी विभागों से दस दिन में लिखित अभिमत मांगे गए।

सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कुछ विभागों ने अभी तक अभिमत नहीं दिए हैं। जबकि, मुख्यमंत्री विभागीय अफसरों के साथ पहली बैठक में ही साफ कर चुके हैं कि कुछ विभाग, निगम, मंडल और प्राधिकरण शोभा की सुपारी बने हुए हैं। इन्हें या तो बंद कर दिया जाए या फिर दूसरे विभागों में मिला दिया जाए। इससे समन्वय बेहतर होगा और मानव संसाधन का सकारात्मक उपयोग भी किया जा सकेगा।

सीएस खुद कर रहे निगरानी

मुख्यमंत्री की मंशा को देखते हुए मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती स्वयं इस काम की निगरानी कर रहे हैं। पिछले सप्ताह जब उन्होंने इस प्रक्रिया की जानकारी ली तो मालूम पड़ा कि एक बैठक के बाद प्रक्रिया ठंडी पड़ गई है। इस पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन्होंने अभिमत नहीं दिया है, उन्हें स्मरण पत्र भेजे जाएं।

यह काम जल्द पूरा कर लिया जाए। विधानसभा सत्र के बाद इस पर निर्णायक बैठक होगी। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में प्रक्रिया चल रही है। इसमें विभागों को और तेजी लाने के निर्देश विभागों को दिए हैं।

समूह बनाने की सिफारिश

नीति सुशासन संस्थान ने सामान्य प्रशासन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, वाणिज्य एवं उद्योग, ग्रामीण विकास, वन और गृह विभाग के समूह बनाने की सिफारिश की है। इसमें यह भी कहा गया है कि सामाजिक न्याय में अनुसूचित जाति कल्याण, अनुसूचित जनजाति कल्याण, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, घुमक्कड़, अर्द्ध घुमक्कड़ जनजाति कल्याण विभाग को एक समूह में रखा जाए। 55 विभागों के 26 समूह बनाए जाएं और बड़े समूहों में अपर मुख्य सचिव को पदस्थ किया जाए।

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