नए कोचों के लिए करना होगा इंतजार, ये है वजह

भोपाल। शताब्दी एक्सप्रेस को अगले एक साल तक आधुनिक सुविधा वाले स्वदेशी कोच नहीं मिलेंगे। इसके लिए कम से कम एक साल का इंतजार करना पड़ेगा। तब तक यात्रियों को पुराने कोचों में ही सफर करना होगा। उसके बाद नए कोच मिलेंगे।

असल में ट्रेन-18 नाम से तैयार आधुनिक सुविधा वाले स्वदेशी कोचों का दूसरा रैक इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई से जारी कर दिया गया है। दो महीने पहले जारी इस रैक की अभी तकनीकी जांच चल रही है। इसके पहले जारी किया गया रैक नई दिल्ली से वाराणासी के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस में चल रहा है। यह पहला रैक नई दिल्ली-हबीबगंज शताब्दी को मिलना था। रेलवे इसकी अधिकृत घोषणा भी कर चुका था, लेकिन नई दिल्ली से वाराणासी के बीच चला दिया। उसी समय तय हुआ था कि चेन्नई से जारी होने वाला दूसरा रैक हबीबगंज-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस को दिया जाएगा। यह रैक फैक्ट्री से निकल चुका है, लेकिन अभी तक तय नहीं हुआ है कि यह हबीबगंज-नई दिल्ली शताब्दी को मिलेगा।

रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आधुनिक सुविधा वाले दूसरे रैक के रूट को लेकर रेलवे बोर्ड गोपनीयता बरत रहा है। क्योंकि इन रैकों की मांग ज्यादा आ रही है। फिर रैक को नई दिल्ली-अमृतसर के बीच चलाने को लेकर चर्चा है जिसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। इस रैक को छोड़कर एक साल में करीब 12 रैक और बनाने की कवायद चल रही है। इसके पुनः टेंडर किए जा रहे हैं।

पुराने कोचों में ये समस्या– कोचों की हालत ठीक नहीं है। समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण ये स्थिति है।

– बर्थ के नीचे लगे पायदान टूटे हैं। ज्यादातर कोचों के गेट जाम रहते हैं।

– महीने में कुछ दिन ऐसे रैक भेज दिए जाते हैं जिनके शौचालय के ऊपर की छतों से पानी रिसता है।

– शौचालय के गेट की चटकनी जाम होती है, एक बार एक यात्री भोपाल से झांसी के बीच फंस गया था।

नए कोच में ये सुविधा मिलेगी

– सेंटर बफर कपलर लगे होंगे, हादसे के दौरान कोच एक-दूसरे पर नहीं चढ़ेंगे। चेयर मूवेबल होंगी।

– एक कोच में 6 सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। मनोरंजन के लिए सभी कोच में एलईडी टीवी लगी होंगी।

– आपात स्थिति में यात्री लोको पायलट से बातचीत कर सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक कोच में टॉक बैक सुविधा है।

– यात्रियों को मुफ्त वाईफाई सुविधा मिलेगी। गेट स्वचलित होंगे, जिन्हें खोलने व बंद करने की जरूरत नहीं होगी।

– कोच आपस में जुड़े हुए होंगे। सीटों के बीच अधिक गेप होगा, कोच में बड़े कांच लगे होंगे। जीपीएस आधारित सूचना प्रणाली सिस्टम आने वाले स्टेशनों की जानकारी देगा।

– वैक्यूम बायो टॉयलेट होंगे। कोच के भीतर ही दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर होंगी। यात्री जरूरत के हिसाब से सामान लेकर चल सकेंगे।

– इंजन अलग से नहीं लगेगा, बल्कि कोच के दोनों तरफ ड्राइविंग कैबिन होंगे। प्रत्येक कोच बिजली से ऊर्जा पैदा कर चलने में सक्षम होंगे।

– कोचों की अंदरूनी बनावट स्टील की होगी, जो स्क्रू रहित होगी। हादसा होता भी है तो यात्रियों को कम चोट आएगी।

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