भोपाल को छोड़ प्रदेश के तीनों महानगरों को मिली सड़कों की सौगात

भोपाल। राजधानी को इस बार (2019-20) के बजट में एक भी सड़क की सौगात नहीं मिली है। बुधवार को वित्त मंत्री तरुण भनोट ने प्रदेश के सभी तीन महानगरों इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर में सड़कों की सौगात तो दी, लेकिन भोपाल खाली हाथ रहा। बीते साल पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया ने 77.82 करोड़ की लागत से शहर में 44 किमी लंबी 15 सड़कों को स्वीकृति दी थी।

शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में एक दर्जन से ज्यादा सड़क निर्माण की मांग रही है। साथ ही शहर के अंदरूनी इलाकों में भी सड़कों की स्थिति बेहद खराब रही है। सूत्रों की माने तो शहर में सड़क निर्माण के लिए उत्तर विधानसभा से विधायक व मंत्री आरिफ अकील ने क्षेत्र में आठ सड़कों की मांग की थी। उधर, हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा, गोविंदपुरा विधायक कृष्णा गौर, मध्य विधानसभा क्षेत्र से विधायक आरिफ मसूद ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क निर्माण की मांग की थी।

इसलिए नहीं मिली भोपाल को सड़क

सूत्रों की माने तो राजधानी में सड़कों की सौगात नहीं मिलने के पीछे की कहानी कुछ और ही है। दरअसल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह ने कई बार बैठक, मंच और विभागीय समीक्षा में कहा है कि शहर में सड़क संधारण व निर्माण के लिए एक एजेंसी होनी चाहिए। शहर में कई सड़क निर्माण एजेंसियों के कारण सही तरीके से प्रबंधन नहीं हो पाता। मामले पर पहले वरिष्ठ अधिकारियों व शासन स्तर पर भी बातचीत की गई थी। साथ ही मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पीसी शर्मा व जयवर्धन सिंह के बीच मामले पर बैठक भी हुई थी। बताया जा रहा है कि इस साल शहर में सड़क निर्माण के लिए एक अलग एजेंसी का गठन किया जाए जाएगा।

एजेंसी निर्माण के लिए यह कवायद हुई

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मंत्री के निर्देश पर पांच माह पहले सड़कों की वर्तमान स्थिति, निर्माण की अवधि, गारंटी पीरियड, ठेकेदार का नाम, कहां से कहां तक, बीच में अन्य एजेंसियों की सड़क हो तो उसकी भी जानकारी मांगी थी। साथ ही वित्तीय वर्ष में बजट व खर्च की राशि की भी जानकारी मांगी गई थी। इस डेटा के आधार पर कमेटी की संरचना तैयार की जाएगी।

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