कर्नाटक: सियासी दुश्‍मनी का शिकार एचडी कुमारस्‍वामी, येदियुरप्‍पा को कुर्सी दिलाएंगे सिद्धारमैया?

बेंगलुरु | दक्षिण भारत में बीजेपी का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। नाटकीय घटनाक्रम के तहत सत्‍तारूढ़ कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के 12 विधायकों ने इस्‍तीफा दे दिया। इससे पहले कांग्रेस के एक अन्‍य व‍िधायक आनंद स‍िंह ने इस्‍तीफा दिया था। इन‍ विधायकों के इस्‍तीफे के साथ ही राज्‍य में बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्‍पा के मुख्‍यमंत्री बनने का मौका बनते दिख रहा है। हालांकि, सियासी पंडितों का कहना है कि कर्नाटक में इस बड़े सियासी उलटफेर के सूत्रधार बने हैं कांग्रेस विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया।
हाइलाइट्स
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, अब तक कांग्रेस और जेडीएस के 13 विधायकों के इस्‍तीफे
इन‍ विधायकों के इस्‍तीफे के साथ ही राज्‍य में बीएस येदियुरप्‍पा के मुख्‍यमंत्री बनने का रास्‍ता साफ होता दिख रहा
सियासी पंडितों का कहना है कि राज्य में सियासी उलटफेर के सूत्रधार बने हैं कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया
कहते हैं कि दुश्‍मन का दुश्‍मन दोस्‍त होता है और कर्नाटक की राजनीति में यह कहावत सच होती दिख रही है। कर्नाटक में जिन विधायकों ने इस्‍तीफा दिया है, उनमें से ज्‍यादातर लोग सिद्धारमैया खेमे के हैं। इनमें विधायक रमेश जारकिहोली, महेश कुमटल्‍ली, बीसी पाटिल, प्रतापगौड़ा पाटिल, बयरेटी बासवराज, मुनिरत्‍न और एसटी सोमशेखर शामिल हैं। सिद्धारमैया समर्थक ये विधायक अब बीजेपी के साथ आते दिख रहे हैं।
सिद्धारमैया की जगह खड़गे को मिलनी थी कमान
कांग्रेस और जेडीएस के सूत्रों के मुताबिक इस बात पर गंभीरतापूर्वक विचार चल रहा था कि सिद्धारमैया की जगह पर वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को लाया जाए। सिद्धारमैया कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार के लिए गले की हड्डी बन गए हैं। यहां तक कि जेडीएस ने राज्‍य में गठबंधन सरकार को बचाए रखने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे को सीएम बनाने का प्रस्‍ताव भी दिया था, लेकिन कांग्रेस ने इस प्रस्‍ताव पर ध्‍यान नहीं दिया।
दरअसल, पूरे विवाद की जड़ सिद्धारमैया का भूतकाल है। सिद्धारमैया कभी जेडीएस के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं थे क्‍योंकि वह एचडी कुमारस्‍वामी को अपना कट्टर दुश्‍मन मानते हैं। एक समय में जब सिद्धारमैया जेडीएस में थे, तब वह पार्टी अध्‍यक्ष एचडी देवगौड़ा के सबसे करीबी थे। हालांकि समय के साथ देवगौड़ा ने अपने बेटे एचडी कुमारस्‍वामी को समर्थन देना शुरू कर दिया। इससे मजबूर होकर सिद्धारमैया कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
सिद्धा ने दिया था गठबंधन तोड़ने का सुझाव
हाल ही में सिद्धारमैया ने कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के साथ मुलाकात के दौरान सुझाव दिया था कि कांग्रेस पार्टी के भविष्‍य के खातिर जेडीएस के साथ रिश्‍ता तोड़ लिया जाए। उन्‍होंने यहां तक कह दिया था कि जेडीएस कांग्रेस विधायकों को काम नहीं करने दे रही है, इसलिए उन्‍हें साथ बनाए रखना मुश्किल होगा। सिद्धारमैया की इस सलाह पर कांग्रेस ने ध्‍यान नहीं दिया और शनिवार को 12 विधायकों ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। इससे पहले सोमवार को एक विधायक आनंद सिंह ने इस्‍तीफा दिया था।
कर्नाटक में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए 16 विधायकों के इस्‍तीफे की जरूरत है। विधानसभा अध्‍यक्ष रमेश कुमार ने ‘व्‍यस्‍तता’ का हवाला देकर अभी विधायकों के इस्‍तीफे को स्‍वीकार नहीं किया है। इन विधायकों ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में अभी जेडीएस-कांग्रेस के और विधायक इस्‍तीफा देंगे। बागी विधायकों का इस्‍तीफा स्‍वीकार होते ही जेडीएस-कांग्रेस समर्थक विधायकों की संख्‍या घटकर 105 पहुंच जाएगी और बीजेपी के भी 105 विधायक हैं।
सरकार से सिद्धारमैया ने खींचे हाथ
कर्नाटक में आए भूचाल से हिली कांग्रेस पार्टी ने डैमेज कंट्रोल के लिए तत्‍काल एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल को बेंगलुरु भेजा। कांग्रेस पार्टी ने यह कदम बहुत देरी से उठाया और इस्‍तीफा देने वाले विधायक मुंबई चले गए। इससे वेणुगोपाल के पास बहुत कम विकल्‍प बचे हैं। सिद्धारमैया ने वेणुगोपाल से मुलाकात की और कहा कि जेडीएस से संबंध तोड़ लिया जाए। उन्‍होंने कांग्रेस आलाकमान को यह भी सूचित किया कि वह अब इस सरकार को नहीं बचा सकते हैं। उन्‍होंने वेणुगोपाल से कथित रूप से कहा, ‘मुख्‍यमंत्री और डेप्‍युटी सीएम को सरकार बचाने दीजिए।’
उधर, कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ डीके शिवकुमार भी इस गंभीर संकट में कुछ खास करते नहीं दिख रहे हैं। इस्‍तीफा देने वाले विधायकों को मनाने का उनका प्रयास विफल रहा। विधानसभा अध्‍यक्ष के कार्यालय पहुंचे शिवकुमार ने विधायक मुनिरत्‍न का इस्‍तीफा पत्र छीनकर उसे फाड़ दिया था। वह चार विधायकों को अपने साथ लेकर चले गए और कहा कि वे इन विधायकों के साथ बातचीत करेंगे।
क्या बीजेपी का है ‘ऑपरेशन कमल’?
शिवकुमार के इस कदम पर बीजेपी के कर्नाटक अध्‍यक्ष बीएस येदियुरप्‍पा के निजी सहायक संतोष ने राज्‍यपाल वजूभाई वाला से इसकी शिकायत की। इस बीच बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्‍पी साध रखी है। बीजेपी यह दर्शाने की कोशिश कर रही है कि उसका इस्‍तीफे से कोई लेना देना नहीं है।
इस्‍तीफा देने वाले विधायक राज्‍यपाल से मिले और राजभवन की पुलिस सुरक्षा में एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। इस बीच महाराष्‍ट्र बीजेपी ने कहा है कि वह इन विधायकों के लिए मुंबई में रुकने का इंतजाम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक में शुरू हुआ यह ‘सियासी नाटक’ बीजेपी के ‘ऑपरेशन कमल’ का हिस्‍सा है।

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