MP के पूर्व मंत्री बिसेन ने केवल 80 हजार आमदनी बताकर बेटियों को दिलाई छात्रवृत्ति

भोपाल। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार में कृषि मंत्री रहे बालाघाट से भाजपा विधायक गौरीशंकर बिसेन कम आय बताकर दो बेटियों को छात्रवृत्ति दिलाने के मामले में फंस गए हैं। लांजी के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने वर्ष 2000 में एसडीएम द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र के साथ पुलिस अधीक्षक बालाघाट से शिकायत की है। इस प्रमाण पत्र में वारासिवनी के तत्कालीन एसडीएम ने जाति के अलावा बिसेन की आय (80 हजार) का भी जिक्र किया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण पुलिस पुराने दस्तावेज खंगाल रही है।

समरीते द्वारा नौ फरवरी 2019 को की गई शिकायत में कहा कि बिसेन ने दोनों बेटियों पायल बिसेन और मौसम बिसेन को पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति दिलाने के लिए वर्ष 2000 में सभी स्रोतों से अपनी आय 80 हजार रुपए बताई है। जबकि बिसेन वर्ष 1984 से विधायक हैं।

वे 1999 में लोकसभा सदस्य भी रहे हैं और 1988 से आयकर दे रहे हैं। फिर भी वर्ष 2000 में सभी स्रोतों से अपनी आय सिर्फ 80 हजार रुपए सालाना बता रहे हैं। समरीते कहते हैं कि मामले में बिसेन पर अपराध दर्ज होना चाहिए, लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति होने के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। ज्ञात हो कि पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले भी स्थानीय स्तर पर यह मामला उठा था।

एसडीएम, तहसीलदार भी जिम्मेदार

मामले में समरीते ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने वाले एसडीएम और तहसीलदार को भी जिम्मेदार बताया है। उन्होंने बताया कि पहली गड़बड़ी बिसेन ने की है। उन्होंने प्रमाण पत्र बनाने के लिए एसडीएम को दिए आवेदन में लिखा है कि उनकी जाति पंवार है और आय एक लाख से कम है।

वे आवेदन में यह भी कहते हैं कि वे क्रीमीलेयर में नहीं आते हैं। समरीते कहते हैं कि पहले तो बिसेन ने अपना स्टेटस छिपाया और फिर एसडीएम ने भी उनका साथ दिया। एसडीएम को आवेदन पर तहसीलदार से जांच रिपोर्ट मांगनी थी, लेकिन ऐसा न करते हुए एसडीएम ने जिस दिन आवेदन दिया गया, उसी दिन प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया इसलिए जिम्मेदार प्रशासनिक अफसरों पर भी मामला दर्ज होना चाहिए।

जांच की जा रही है

मामला हाईप्रोफाइल है। इसलिए गंभीरता से जांच कराई जा रही है। जांच में जो दोषी पाए जाएंगे। उन पर कार्रवाई की जाएगी। 

अभिषेक तिवारी, पुलिस अधीक्षक, बालाघाट

बिसेन के खिलाफ सभी प्रमाण पुलिस को दिए गए हैं। उनके और तत्कालीन एसडीएम के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होना चाहिए, लेकिन मामले में पुलिस का रवैया ढीला है। 

किशोर समरीते, पूर्व विधायक, लांजी

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